Saturday, 20 June 2015

मै वही लिखता हूँ, जो हम और हमारे आसपास के लोग देश और दुनिया की घटनाओं पर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं। लिखना जोखिम भरा हो सकता है, लेकिन अबतक कोई ऐसा पैदा नहीं हुआ, जो किसी के अंदर के विचारों को मार दे। लिखना शुरू से ही मेरा शौक रहा है, जो संभव है की आगे हमारे पेट-पालने का एक जरिया भी बनेगा..... आते रहिऐगा.....

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