Sunday, 29 November 2015

ISIS की मंशा क्या?

पेरिस में जो कुछ हुआ उसने पूरे संसार को झकझोर दिया| ऐसा नहीं है की फ्रांस की कोई बड़ी आबादी हताहत हुई| उससे कई गुना ज्यादा मौतें विभिन्न आतंकवादी हमलों में हमारे देश में हो जाती है| लेकिन कोई हल्ला नहीं मचता, क्योंकि हमारी ख़ुफ़िया व रक्षा प्रणाली पश्चिमी देशों की तुलना में काफी कमतर है| यूरोपीय ख़ुफ़िया एजेंसी की साख पर सवाल उठने लगे हैं| फ़्रांस दुनिया का सबसे सहिष्णु राष्ट्र माना जाता है| उसने बड़ी तादाद में सीरिया व तुर्की से आये शरणार्थियों को पनाह दी, उदारता दिखाई लेकिन उसका यह परिणाम? वाकई झकझोर देता है!  इस्लाम का इतिहास रहा है की वे जहाँ रहते हैं, उसके आसपास के माहौल को अपने जैसा थोपने की जुर्रत करते हैं| फ़्रांस में बुर्के पर पाबंदी है, पर वे चाहते हैं की सारे लोग बुर्के पहन कर घूमें, लोग ईद मनाएं, कुरान से चलें, शरियत को मानें| ऐसा नहीं होता! ISIS का जन्म अमेरिकी-इराक नीतियों से हुआ है| दुनिया भर में अपनी युद्ध अर्थव्यवस्था को फलने-फूलने के लिए अमेरिका ने ही अलकायदा को पनपने दिया, ISIS को खूंखार होने दिया| अब क्यों डर रहे हो? जाओ किसी और देश की राजनीतिक, आर्थिक आजादी ख़त्म करके एक और आतंकी संगठन को जन्म दो!


अमेरिका के जवान हवाई जवान हैं| वह अपने सैनिकों को जमीन पर उतारने से घबराता है| ड्रोन,Image result for missile image मिसाइल, लड़ाकू विमानों से बमबारी करके ISIS को ख़त्म नहीं किया जा सकता| चूँकि सीरिया व इराक के जिन रिहाइशी ठिकानों पर इस्लामिक स्टेट का कब्ज़ा है वह जगह बेहद संकीर्ण है, पेड़-पौधों व जंगलों से भरे पड़े हैं| उनके लड़ाके जेहादी गतिविधियों में कितने परिपूर्ण हैं ये पेरिस की घटना से पता चलता है| अमेरिका, रूस और फ़्रांस तीनों को इस्लामिक आतंक का डर 9/11 के बाद फिर से एहसास होने लगा है, उनकी घबराहट बढ़ी है और बेचैनी में उनके ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले कर रहे हैं| ये बेचैनी अब क्यों? 26/11 के वक्त कहाँ थे? क्यों नहीं तब पाकिस्तानी आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करके आतंकवाद को कमजोर करने का प्रयास किया? पेरिस में तो 129 मरे, लेकिन भारत में अबतक 80 हज़ार से ज्यादा मौतें आतंकी हमलों में हुई है, क्या अमेरिका को यह नहीं पता की इनसब का सूत्रधार कौन है?


अभी हाल तक अमेरिका की विभिन्न देशों की धार्मिक आजादी पर नज़र रखने वाली एजेंसी कह रही थी की ‘भारत में असहिष्णुता बढ़ रही है’| ओबामा ने भी सौहार्द की अपील की थी| पर अब क्यों कह रहें है की इस्लाम आतंकवाद का पर्याय है| (इससे ओबामा भी हमारे सेक्युलर नेताओं की नज़रों में सांप्रदायिक हो ही गए होंगे)इस्लामिक स्टेट जिहाद के नाम पर अपने कट्टर लड़कों के साथ दुनिया भर में इस्लामी राज्य का डंका बजा रहा है| काले झंडे लेकर इस्लाम के बन्दों का नेतृत्व कर रहा बगदादी किस्म-किस्म के सेनानियों के साथ समूचे विश्व का इस्लामीकरण कर देने का सपने को लेकर आगे बढ़ रहा है|  ISIS की इस बर्बर मानसिकता का खामियाजा किसे भुगतना होगा? इस्लाम को ही!  क्योंकि फ़्रांस एक बार फिर मुसलमानों को पनाह देना बंद कर देगा| उसकी ऐसी हरकतों का खामियाजा दुनिया भर के मुसलमानों को भुगतना पड़ेगा| तमाम देश मुस्लिमों को आने की अनुमति नहीं देंगे, मदरसों को बंद कर दिया जाएगा, मस्जिदों में तक पाबंदी लगाई जा सकती है| अगर इसके बाद भी हालात बेहतर नहीं हुए तो संभव है की पश्चिमी देश मुसलमानों को देश से भगा देने को बाध्य हो जाएँ! और इसका अनुसरण बहुत सारे देश कर सकते हैं|

ISIS भारत में इस्लामी राज्य कायम करने की इच्छा जता चूका है| और बगदादी के लिए तो भारत बेहद सॉफ्ट टारगेट है| यूँ सैकड़ों को लाइन में खड़ा करके गोली मार देना... शरीर में बम बांधकर उड़ा देना, सरेआम गला रेत देना... सोंचकर काँप जाता हूँ!  भारत में आसान भी है, उनकी मदद के लिए है ना हमारी सरकारी की चुनावपरस्त नीतियाँ, निकम्मे अफसर और राजनेताओं की सेक्युलर विचारधारा!  बेशक, हम तो काफी पहले से ही कश्मीर के नाम पर आतंक झेल रहे हैं| बस कमी है तो बगदादी का भारत आकर इस्लामी राज की डुगडुगी बजाने की... क्योंकि जबतक दुश्मन दरवाजे तक नहीं आ जाता, हमें विश्वास ही नहीं होता की खतरा सही में है... यही दिल्ली का इतिहास रहा है... 

लेखक:- अश्वनी कुमार, पटना जो ब्लॉग पर ‘कहने का मन करता है’(ashwani4u.blogspot.com) के लेखक हैं... आते रहिएगा...


No comments:

Post a Comment