Sunday, 14 August 2016

आजादी की अपनी गाथा

देश को जब आजादी मिली तब मैं पैदा नहीं हुआ था| स्कूली किताबों से, कहानियों से, कविताओं से और देशभक्ति फिल्मों को देखकर-सुनकर आजाद होने का पता चला| हम स्वतंत्र भारत में जीने वाले लोग हैं, जहाँ स्वतंत्रता के नाम पर या आजादी के नाम पर कितनों को ठग लिया जाता है, लुटा जाता है, मारा जाता है और फिर हर 15 अगस्त या 26 जनवरी को तिरंगे के नीचे खड़े होकर उसी आजादी का जश्न भी मनाया जाता है| धर्म और जातिवाद का अफीम समाज को सदियों से मदहोश करता आया है| ये मदहोशी उस पाखंडी सम्प्रदायवाद और जातिवाद के संकीर्ण विचारधारा का परिणाम है, जिसमें लोग ईश्वरीय व्यवस्था का झूठा नारा देकर लोगों की आजादी को छिनने का प्रयास कर रहे हैं| आजादी के नाम पर अपनी व्यवस्था थोपने का ढोंग रच रहे हैं|

राष्ट्रवाद और देशप्रेम के परिभाषाओं में बड़ा अंतर पनपने लगा है| देशप्रेम के गहरी खाई के दोनों ओर खड़े विपरीत मानसिकता लिए तथाकथित राष्ट्रवादी लोग एक-दुसरे को देशद्रोही घोषित कर रहे हैं| पर कोई इंसानियत के नाते इस देशभक्ति के गड्ढों को पाटने के कोशिश भी नहीं करता| इनलोगों के झगड़ों में कई नेता और दल उसी गड्ढे की मिट्टी से अपना घर लीप कर गड्ढे को और गहरा बना दे रहे हैं| भारत राष्ट्र राज्य की बनावट इसकी ख्याति रही है| इसका सामाजिक तानाबाना दुनिया में अलग पहचान की वजह है| लेकिन इसी सामाजिक तानेबाने पर लोगों की व्यक्तिगत महत्वकांक्षा भारी पड़ रही है| हिन्दू मुसलमान को मार रहा है और मुसलमान हिन्दुओं को| दलितों को सवर्ण मार रहा है तो सवर्णों को पुलिस, नेता और व्यवस्था| पश्चिम वाले उत्तर वाले को देखना नहीं चाहते तो पूरब वाला उत्तर वाले को देखना बर्दाश्त नहीं|

देश में एक संविधान है जैसा भी है लोगों को कायदे से चलना सिखाता है| पर हकीकत बहुत भयावह है| देश के हर कोने में हर लोगों का अपना संविधान है| इसलिए की कहीं धर्म के नाम पर लोगों को उजाड़ दिया जाता है तो कहीं भाषाई आधार पर मजदूरों को पिट दिया जाता है तो कहीं संस्कृति का हवाला देकर धार्मिक कपडे न पहनने वाली महिलायों को सरेआम कूट दिया जाता है| देश के संसाधनों को अपना बताया जा रहा है, हर क्षेत्र को किसी न किसी ने उसे अपना जरूर घोषित कर रखा है| आजादी का नाम पर आजाद लोगों का शोषण हमें डरा देता है की कहीं अंग्रेज फिर से न आ गए हों| पुलिस, प्रशासन, जज या अफसर सभी का अपना संविधान, अपना कानून है| वे अपने बनाए नियम कायदे से चलते हैं| गाँधी की फोटो के नीचे मिठाई के नाम पर करोड़ों का धंधा चल रहा है| फिर तो गाँधी की विचारधारा फ़ालतू और बकवास सी भी दिखती है|

आजादी के नाम पर जनता को ठगने का इतिहास काफी पुराना है| हर वर्ष देश के प्रधानमंत्री लाल किले से वादों की फुलझड़ी से देश को रोशन करते हैं| सब बेहतर कर देने का भरोसा अतीत के सारे घोटालों पर पर्दा लगा देने जैसा है| फिर भी जनता हर वर्ष प्रधानमंत्री के भाषणों को सुनकर झूम जाती है लेकिन उसे महसूस करते-करते अगला स्वतंत्रता दिवस चला आता है|

क्या गाँधी जी ने जिस आजाद भारत की कल्पना की थी वो वाकई में यही भारत है? गाँधी के आदर्शों का बखान करते-करते उनके चापलूसों ने अपनी सहूलियत के हिसाब से संविधान बनाया, कानून बनाया और जनता पर राज करते रहे की साजिश रची| सिस्टम के नाम पर हर चौक-चौराहे से लेकर बड़ी-बड़ी इमारतों में डंडे देकर अपने पहरेदार बिठाए| उन्हें लाठी देकर जनता की आजादी को छिनने का पूरा इंतजाम किया| चुनावों के वक्त जनता के लुटे हुए पैसों से उसके उम्मीदों को सफ़ेद बनाया जाता है| बेशक, इस आजाद भारत की जनता अपनी आजादी का मूल्य जानती है, समझती है पर गरीबी और अशिक्षा के कारण सबकुछ स्वीकार कर लेना उसकी मजबूरी है| क्योंकि उसे पैसे चाहिए, शराब चाहिए और सिस्टम की मार से बचने के लिए किसी पार्टी का झंडा भी चाहिए|

आजाद भारत की गाथा इस आधुनिक दुनिया में स्कूली किताबों या नेताओं के भाषणों
के सहारे नहीं टिक सकती| झंडे लहरा देने से कोई देशभक्त नहीं हो जाता| राष्ट्रवाद और देशभक्ति का जूनून लोगों में एक दिन झंडे के नीचे खड़े हो जाने से नहीं आता| या फिर हथियारों के प्रदर्शन से कोई अपनी देशभक्ति की विचारधारा यूँ ही नहीं बदल देता| क्योंकि देश में राष्ट्रवाद की आड़ में इतनी साजिशें रची जा रही है की हमारी आनेवाली पीढ़ी तो इस एक दिन भी देश पर गर्व करने से कतराएगी...

क्या वास्तव में भारत वही धरती है जहाँ बुद्ध, महावीर जैसे शांतिदूत, चाणक्य जैसा पथप्रदर्शक या सम्राट अशोक, महाराणा प्रताप, भगत सिंह, आजाद या बोस जैसे वीर पैदा हुए थे...   अगर हाँ तो इस महान धरती की मिट्टी में जहर किसने घोला? बंजर बनाने की साजिश किसने रची? जबाव हमें पता है फिर भी ढूंढने का ढोंग करना पडेगा... क्योंकि उनके वंशज भी अभी मौजूद हैं और इन महान वीरों के भी, देखते हैं जीत किसकी होती है... 


लेखक:- अश्वनी कुमार, जो ब्लॉग पर ‘कहने का मन करता है’
(ashwani4u.blogspot.com) के लेखक हैं... ब्लॉग पर आते रहिएगा...

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