Tuesday, 4 April 2017

हिन्दू स्वाभिमान की गाथा ‘राम’

अयोध्या में रामजन्मभूमि विवाद से देश के हिन्दू स्वाभिमान और उनके इष्टदेव भगवान राम की व्यापक अवहेलना हुई| राजनीतिक और धार्मिक स्वार्थ के पहलुओं पर इतने संवेदनशील मसले को टरावा दिया जाना हिंदुत्व और हिन्दू जनमानस की भावनाओं से खेलना है| सरकार और कोर्ट ने रामजन्मभूमि को आजादी के बाद से ही जनभावना की क़द्र न करके इस्लामी कट्टरपंथियों और आक्रमणकारियों की स्मृति में हिन्दूओं की आस्था और विश्वास का खूब मखौल उड़ाया| अयोध्या और भगवान राम की आस्था को सेकुलरों ने बिना पेंदे के लोटे जैसा व्यव्हार जताया, फिर भी किसी को हिन्दूओं की मासूमियत और सहनशीलता पर किसी को तरस नहीं आया|

बात सिर्फ अयोध्या में बाबरी मस्जिद की नहीं हैं, बल्कि मथुरा, काशी विश्वनाथ सहित उन सभी मंदिरों की है जिसे विध्वंस करके मस्जिदें बनाई गयी| इस्लामी बर्बरता, रक्तपात और विध्वंश की यादें इन्हें देखकर हिन्दूओं को हज़ार साल गुलामी की घावें हरी कर देता है| बाबर से लेकर औरंगजेब और गजनवी की बर्बर इतिहास का प्रतीक समभाव व धार्मिक समता में हमेशा आड़े आता है| रक्तरंजित और खंजरों के इतिहास को लोकतान्त्रिक व्यवस्था में लादकर चलना व्यवस्था को पंगु बनाता है| इस्लामी कट्टरपंथ ने दुनिया और भारत में मुसलमानों के व्यवहार में काफी परिवर्तन लाया है| उनकी सोच में काफ़िर और गैर-इस्लाम जैसी मनोवृति इस्लाम को अन्य धर्मों से दूर कर रही है|
इस्लामी कट्टरपंथियों का उत्पात का ही नतीजा पहले भारत में नरेन्द्र मोदी, अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप और फिर योगी आदित्यनाथ हैं| मुस्लिमों को समझना चाहिए की दुनिया में धर्म के नाम क्रूसेड या हिन्दू बनाम मुसलमान या मुस्लिम बनाम ईसाई की उनकी जंग कमजोर पड़ने लगी है|

भारत में रामजन्मभूमि मसला कोई नया नहीं है| या उनका यह समझना भी गलत होगा की ये संघ या भाजपा द्वारा प्रायोजित हिन्दूओं को भडकाने की साजिश है| रामलला और बाबरी विवाद आजादी के पहले से है और तब से है जब संघ-भाजपा आस्तित्व में भी नहीं थे| रामलला हमेशा से हिन्दूओं की जनभावना, आस्था का लौ रहा है| आस्था के केंद्र में बाबरी विध्वंस का अतीत भी है तो भव्य राम मंदिर के सपने भी है| मुसलमान ये कतई न सोंचें की अदालतों और सेकुलरों की आड़ में ये मामला बहुसंख्यक बनाम अल्पसंख्यक बनकर वैसे ही टला रहेगा जैसे कांग्रेस के जमाने में था| मतलब साफ़ है की हिन्दूओं का अपने धर्म के प्रति सजगता उसे गंभीर बना रही है| मंदिर निर्माण में मुस्लिमों और सेकुलरों का थोथा हद बेशक हिन्दू युवा नौजवानों को दूसरा रास्ता पकड़ा सकती है| क्योंकि प्रश्न भगवान राम के अस्तित्व का है|

Image result for जय श्री राम imageहिन्दू स्वाभिमान की गाथा वर्तमान में तो रामजन्मभूमि से जुड़कर मंदिर निर्माण के सपने तक है| हिन्दू स्वाभिमान का दर्द तम्बू में राम से भी है और सरकार का अदालत में गिडगिडाने से भी है| मर्यादापुरुषोत्तम भगवान् राम की आस्था-विश्वास हिन्दू नवजागरण की चेतना है| इसी के मूल में राजनीति के शिखर पर आरएसएस की उपस्थिति और भगवाधारी को राजयोग मिलना नए हिंदुत्व का आगाज है... संकेत स्पष्ट है...


Image result for jai shri ram logo imageलेखक:- अश्वनी कुमार, जो ब्लॉग पर ‘कहने का मन करता है’ (ashwani4u.blogspot.com) के लेखक हैं... ब्लॉग पर आते रहिएगा...

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