Thursday, 30 July 2015

डॉ० कलाम, आप फिर से आओ ना...

डॉ० अवुल पकीर जैनुअब्दिल अब्दुल कलाम। आपने तमिलनाडु के रामेश्वरम के गाँव में बेहद साधारण परिवार में जन्म लिया। देश के अन्य लोगों की भांति आपने भी तमाम मुश्किलों का सामना किया। अख़बार बेचे, बहुत से असफलताओं को बड़ी आसानी से आपने गले लगाया, तमाम कठिनाइयों के साथ चलकर उन्हें मात दी। देश के पहले गैर-राजनीतिक राष्ट्रपति बनकर करोड़ो लोगों के प्रेणास्त्रोत बने। इनसब में आपका बच्चों से प्यार वाकई 'महामानव' का दर्जा देता है। पर, अब हमें सपने कौन दिखायेगा? असफलताओं से न घबराने के लिए कौन कहेगा? भारत को विश्वगुरु बनाने का विश्वास हमें कौन दिलाएगा?
                                                                                    डॉ० कलाम, आप शायद ही देश के लोगों के दिलों से बाहर हो पायेगें। वर्ष 1947 तो स्वतंत्रता का वर्ष था, पर 1998 पूर्ण स्वाधीनता का वर्ष था। पोखरण-2  में आपके अथक, अदम्य साहस और परिश्रम के फलस्वरूप ही आज भारत की गिनती महाशक्तियों में होती है। अंतरिक्ष विज्ञानं से  स्नातक करने के बाद देश की रक्षा तैयारियों का जिम्मा अपने ऊपर ले लेना किसी के बूते की बात नहीं थी। पृथ्वी, अग्नि जैसी मिसाइलो के सूत्रधार का ऋण  शायद ही कभी चुका पाये। लेकिन हाँ, आपके ये कहने के बावजूद भी की 'मेरी मृत्यु के बाद कोई छुट्टी ना मनाई जाए' पूरा देश आपके लिए भावविभोर होकर श्रद्धांजलि  दे रहा है। डॉ० कलाम जैसा सपूत शायद ही इस युग में दुनिया को मिले, ये सभी जानते हैं। पर, आपके जैसा त्यागी-सन्यासी भी तो नहीं मिल सकते। जो राष्ट्रपति बनने के बाद अपनी सारी सम्पति-बचत देश के जरूरतमंदो को दान कर दे, सिर्फ ये जानने पर की राष्ट्रपति की जिंदगी भर के खर्चे सरकार ही वहन करती है। 
                                                                                      जैसा की आपने अपनी आत्मकथा में लिखा है की "मेरे परदादा अवुल दादा पकीर और मेरे पिता जैनुलाअबदीन के बाद मेरे ऊपर उनकी पीढ़ी ख़त्म हो जायेगी,  मैंने कुछ हासिल नहीं किया...मेरे पास कुछ नहीं...ना बेटा, न बेटी न परिवार। यही कथन आज लोगों को रुलाने पर मजबूर कर रही है। सारे भ्रष्टाचारी, अहंकारी नेताओं को उनसे सीख लेनी चाहिए की वास्तव में देश-प्रेम कैसा होता है। आपका ये कोई स्वतंत्रता वाला देश-प्रेम नहीं था, ये कोई वीर-भूमि में इतिहास रचने वाला देश-प्रेम नहीं था, बल्कि अपनी त्याग, तपस्या और मेहनत के बल पर भारत का सिर दुनिया में गर्व से ऊँचा करके भी  साधारण बताने वाले व्यक्ति का देश-प्रेम था। एक शिक्षक के रूप में खुद को मानने वाले अपनी इच्छा के अनुसार ही पढ़ाते-पढ़ाते चले गए, इससे  ज्यादा भगवान का क्या आशीर्वाद हो सकता है?
                                                                                भारत रत्न, मिसाइल मैन डॉ० कलाम को  पूरा देश याद कर रहा है। कलाम साहब, ऐसी विदाई शायद दशकों में पहली बार किसी को मिली हो। फिर भी तो आपके व्यक्तित्व से कम ही है। आप फिर से आओ ना... देखो ये बच्चे कैसे नम आँखों से आपका इन्तजार  कर रहे हैं...
देखो कैसे पूरा देश आपको फिर से आने के लिए कह रहा है... तीनों सेनाएं, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री समेत पूरा देश 7 दिनों का राष्ट्रीय शोक मना रहा है। डॉ० कलाम, आज तक मैं की राजनेता या हस्ती को सॉलूट नहीं किया लेकिन, आपके लिए मेरा यह सॉलूट...Image result for army salute kalam image
लेखक:- अश्वनी कुमार, जो कलाम जैसा बनने की नाकाम कोशिश ही कर सकता है, बन नहीं सकता। 

No comments:

Post a Comment