Tuesday, 15 August 2017

आजादी@70 श्रेष्ठ भारत

आज वक्त है दिखावे का! उठाओ झंडा, फहरा दो तिरंगा! दिखा दो दुनिया को अपनी ताकत! लेकिन देश से गरीबी, भुखमरी ये सब नहीं मिटना चाहिए! पेट पालने का साधन है नेताओं का!

हवस की निगाहों से न जाने कितने तिरंगे फहराए जायेंगे... ये हवस देश को लील जाने की है...
56 सेकंड तक झंडे को सलामी देने में फट जाती है इन्हें, तो सोंचो की हमलोगों ने 70 सालों से इन काले अंग्रेजों को सलामी देने में कितना वक्त और एनर्जी बर्बाद किया!

राष्ट्रगान गा लो, देशभक्ति का जूनून पैदा कर लो! सिर्फ एक दिन, फिर साल भर गरियाते रहना! देश की आजादी फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन से है! देश की आजादी, किस ऑफ़ लव से है! देश की आजादी इन्सल्लाह टुकड़े होंगे से है! देश की आजादी अवार्ड वापसी से है!

आजादी का 70 साल का सफ़र हमें यही सब सिखाता है! की अपनी मां, अपनी धरती, अपनी सेना को गरियाओ... अपनी इज्जत, मान-मर्यादा पाकिस्तान और चीन को बेच आओ! राष्ट्रवाद से घृणा करो! देशभक्ति को गाली मानो!

तो सुनो...

ये धरती है वीरों की जहाँ एक पुष्प की अभिलाषा भी सेना के पैरों तले कुचलने की होती है...

ये धरती है उन शहीदों की जो भरी जवानी में भारत माँ के लिए फांसी के फंदे से हँसते हँसते झूल गये थे...

ये धरती है उस देश की, जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा... ऐसा भारत देश है मेरा...

ये 70 वर्षों का आजाद भारत है... राष्ट्रवाद से सिंचित, देशप्रेम से पोषित और तिरंगे जैसा स्वाभिमानी...

सेना हमारी आन-बान-शान है. सरकार हमारी राष्ट्रवादी है. जनता उदार है, तभी आजादी है...
नहीं तो तिरंगे को हवस से देखने वालों की गर्दन उखाड़ के हाथ में थमा दिया जाता! देश से गद्दारी अब स्वीकार नहीं होगी! कांग्रेस ने गद्दारी आजादी से ही की लेकिन परिणाम अब भुगत रहा है!

देश को बांट दिया, बाप का राज था क्या! अब जरा बोल के भी दिखाओ, जुबान खींच के सीने पर चढ़कर तिरंगा गाड़ देंगे! अपनी मनमर्जी नहीं चलने वाली अब, चाहे सरकार हो या न्यायपालिका! संविधान को देश के दायरे में लाओ! और देश को जनता के उम्मीदों के दायरे में लाओ, तब आजादी सफल होगी!

नेतागिरी का अंत करो! भाषणबाजी और जुमलेबाजी को अमीरों के लिए इस्तेमाल करो, गरीबों के लिए नहीं!
देश को जनभावना से चलना चाहिए, न की काले अंग्रेजों के आदेश से!

आस्तीन के साँपों से देश को बचाओ! हिंदुस्तान का खाकर उसी में थूकने वाले हरामियों को ठिकाने लगाओ! खानदान पाकिस्तान में है और ये लोग हिंदुस्तान की धरती को नापाक बनाने की साजिश में लगे हैं!

आजादी का सारा क्रेडिट इन गद्दारों को दो जो देश को नोचकर खा गए! वंशज उसी के हो तो गद्दारी अभी भी दिख जाती है हमें!

स्वतंत्रता ऐसे नहीं आती... मजबूत इरादों से भी नहीं आती... झंडा और नारे से भी नहीं आती...

त्याग करना पड़ता है आजादी के लिए, जो पिछले 70 सालों से देश की आधी जनता कर रही है! रहने को छत नहीं, खाने को रोटी नहीं और पहनने को कपडे नहीं!
फिर भी अगर देशभक्ति को जूनून देखना है तो जाओ आज किसी गाँव के सरकारी फर्टीचर स्कूलों में! मतलब ज्यादा नहीं पता बच्चों को मगर उनके नारों में भारत माँ की गर्जना सुनो!

“जो भारत से टकराएगा... चूर-चूर हो जाएगा...”

झंडे का सम्मान बच्चों से सीखो, जो एक रूपये के झंडे से आजादी का जश्न मनाकर कई महीनों तक घर के छत पर फहराता रहता है!
ये है आजादी का जश्न जिसके जोश में हमारा हिंदुस्तान है... लाल किले के प्राचीर से मोदी की गर्जना है और एक नए भारत को गढ़ने की कोशिश है जो सुमित्रानंदन पन्त की इन पंक्तियों से लबरेज है की...

“जो भरा नहीं है भावों से
जिसमें बहती रसधार नहीं।
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं...


✍ अश्वनी ©

Wednesday, 2 August 2017

कश्मीर को चाहिए आजादी

किसको किसको आजादी चाहिए, लाइन में लग जा! कश्मीर ले चलो अभियान छेड़ो! सेना स्वागत की तैयारी में बैठी है! 
बंगाल से कश्मीर भाया दिल्ली जेएनयू आजादी स्पेशल ट्रेन की गारंटी हम लोग ले लेंगे! टिकट के पैसे भी दे देंगे है! हिम्मत तो निकलो शिकारी वहां घात लगाए बैठा है!
खूब डफली बजा कर नारे लगईओ!
पिछवाड़े पर सेना की धुन बजेगी तो सारी आजादी की औकात घुस जाएगी!
बेटा यह वही मोदी है जो 3 साल पहले भी था मगर उसे बदला तुमलोगों ने! सेना ने रक्त पात का आगाज कर दिया है।

दिनदहाड़े और डंके की चोट पर सेना ने एनकाउंटर मचा रखा है! कब तक छुपोगे, बाज की नजर लग चुकी है मोदी को!
आओ सामने बरसाओ पत्थर! सीधे अल्लाह के पास रवाना हो जाओगे! चेतावनी नहीं गोली चल रही है!
चड्डी-वड्डी लेकर आना, सुना है कि जन्नत में भारी मांग है! 

बेटा मोदी बिना बोले इतना कर रहा है तो सोचो कि अगर बोलकर करे 100 करोड़ लोगों का सपोर्ट पाकर सेना बिना सोचे समझे रवाना करने लगेगी!

अभी मोदी ने धारा 35ए में धीरे से उंगली डाली है तो तुम्हारी महबूबा इतना उछल रही है!
सोचो कि अगर 370 में बंदूक की नली घुसाएगा तो क्या करोगे? अभी वक्त है अच्छे से प्लान बना लो नहीं तो सोचने का भी समय मोदी नहीं देने वाला!

धारा 370 पर एक्शन हुआ तो कश्मीर में सबसे पहले अंबानी कूदेगा और कश्मीरियत और इस्लामियत की धज्जियां उड़ा कर रख देगा! होटल रेस्टोरेंट और हॉलीडे पैलेस के लिए घाटी की शान होगी! कट्टरपंथ का हलाला हो जाएगा बिजनेसमैनों के हाथों!

पाकिस्तान की नाजायज औलाद बनने की जल्दी में घाटी से ही आजाद हो जाओगे! पाकिस्तान एक घास भी उखाड़ नहीं पाएगा कश्मीर में सेना के रहते! गलती की तो इंडियन बम ही गिरेगा ऊपर से और नाम पाक का होगा! इंडियन दिमाग है बेटा, खुराफाती तो होगी ही!

ज्यादा उछल कूद मत मचाओ! आतंकवादियों का एनकाउंटर हो रहा है, चुपचाप उसका समर्थन करो!
पत्थरबाजी की चुतियापा की तो मोदिया दिल्ली से बैठ कर सब देख रहा है! इशारा हुआ नहीं कि पिछवाड़े में बम घुसाकर उड़ाने लगे जाओगे!

Image result for army beating stone peltor imageबदलाव देखो बेटा, की पहले आतंकियों को पकड़ा जाता था अब गोली मारने के साथ साथ मोहल्ले को भी उड़ा दिया जा रहा है! मोदी इजराइल घूमने नहीं गया था पूरा इंतजाम करके आया है!
सेना का स्टाइल बिल्कुल मोसाद वाला लग रहा है!

जनता बदली तो मोदी आया! मोदी बदला तो सेना का स्वाभिमान बदला! और अगर सेना बदली तो कश्मीर बदलेगा, कश्मीर का झंडा बदलेगा और शान से हमारा तिरंगा लाल चौक पर फहराकर सेना की सलामी लेते हुए वंदे मातरम की धुन पर हवा में इतराते हुए पाकिस्तान की मां की आंख कर देगा...
जय_हिंद

✍ अश्वनी ©



सेना का सफाई अभियान

कश्मीर में इन दिनों सेना ने आतंकियों के विरुद्ध एक छदम युद्ध छेड़ रखा है। सेना ने बुरहान वानी से जो शुरुआत की है वह बदस्तूर अब तक बेहद सफल तरीके से जारी है। घाटी में भारतीय सेना द्वारा की जा रही कारवाई में सरकार द्वारा दी गई खुली छूट का साफ-साफ अंदाजा लगाया जा सकता है। कल लश्कर का कमांडर दुजाना का बेहद खौफनाक तरीके से एनकाउंटर किया गया। उसमें एक बात गौर करने वाली थी कि उसे बिल्डिंग समेत उड़ा दिया गया जिसमें वह छुपा था। भारतीय सेना के मनोबल और पराक्रम का एक नया अंदाज घाटी में देखने को मिल रहा है।

कश्मीर में भारतीय सेना जिस प्रकार से आतंकियों का सफाया करने में जुटी है उससे साफ है कि मोदी सरकार की कश्मीर नीतियों में आतंकी बर्बरता का जवाब सैन्य कारवाई है। घाटी के अलगाववादियों तथा आतंकी संगठनों के प्रमुख नेताओं पर सरकार सख्ती के मूड में नजर आ रही है। एनआईए ने पाकिस्तानी फंडिंग के मामले में आठ अलगाववादी नेताओं को गिरफ्तार किया। मोदी सरकार के पिछले 3 साल के शासन काल में कश्मीरियों ने खूब उत्पात मचाया, सरकार की फजीहत करवाई लेकिन अचानक मोदी सरकार के बदले स्टैंड से कश्मीरी तथा पाकिस्तान सकते में है। विभिन्न आतंकी संगठनों के टॉप कमांडरों की हिट लिस्ट बनाकर सेना सीधा एनकाउंटर करने में जुटी है। पत्थरबाजों को आतंकी समर्थक मानकर उन पर सेना ने सीधी गोलीबारी करना शुरू कर दिया है। इससे कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में काफी कमी आई है। सेना की इस बदले स्टैंड के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और मोदी की रणनीति का हाथ है।
सेना को दी गई खुली छूट आतंकियों को इस कदर परेशान कर रही है कि वह अपने बचने के इंतजाम तक कर पाने में असमर्थ हो चुके हैं। अब आतंकियों को सरेंडर करने की मोहलत नहीं दी जा रही! ना कोई मान-मनौव्वल ना गुजारिश सीधा एनकाउंटर! यह भारतीय सेना की नई कश्मीर नीति है। ऐसी नीति की जरूरत काफी पहले से कश्मीर में थी लेकिन राजनीति की वजह से घाटी में आतंकियों व अलगाववाद को पनपने का मुफीद मौका दिया गया।

कश्मीरी चरमपंथी पहले सेना और सरकार को डराते थे लेकिन अब उन्हें उसी सेना से मत खानी पड़ रही है, इसकी वजह सिर्फ और सिर्फ सरकार की मजबूत राष्ट्रवादी इच्छाशक्ति और जुनून है जो आतंक के सफाई को प्रतिबद्ध है...

अश्वनी ©



सरकारी स्कूलों की बदहाली

देश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर शर्मिंदगी पैदा करता है। मास्टर साहब स्कूल आते हैं लेकिन बच्चों की हाजिरी कि जगह उन्हें अपनी हाजिरी की ज्यादा चिंता होती है। गरीबों के बच्चों के भविष्य की जगह उन्हें अपने बच्चों का भविष्य नजर आता है। सरकार ने सरकारी स्कूलों में गिरती शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रशासकों की निगरानी का इंतजाम कराया है, लेकिन फिर भी देश की शिक्षा व्यवस्था प्राइवेट स्कूलों के इर्द-गिर्द ही घूम कर समाप्त क्यों हो जा रही है?

Image result for poor student india imageसरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की काबिलियत और उनके समझ को कमतर करके क्यों आंका जाता है? शिक्षकों की तमाम मांगे, उनकी वेतन वृद्धि, उनके नियोजन से संबंधित बहुत सारी बातें हमें अक्सर देखने और सुनने को मिलती है। सरकार को मजबूर किया जाता है, लाठी-डंडे लेकर नंगे होकर शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन होना अब आम बात हो चला है!
सरकारें वोट बैंक के चक्कर में उनकी तमाम गैरजरूरी मांगों को दबाव में मान भी लेती है। जनता के खजाने पर अतिरिक्त बोझ डाल कर उनकी मनमानी को बढ़ाने का भरपूर इंतजाम कर दिया जाता है, फिर भी क्या जिस गरीब जनता के खजाने पर इन शिक्षकों के वेतन का बोझ है क्या उनके बच्चे इसका फायदा उठा रहे हैं? या उनका पैसा मुफ्त खोरी की भेंट चढ़ा जा रहा है!

बिहार और उत्तरप्रदेश जैसे राज्य में प्राथमिक स्तर से लेकर हाईस्कूल स्तर तक शिक्षा की गुणवत्ता का घोर अभाव देखा जा सकता है। सरकारें प्रयास तो खूब कर रही है लेकिन शिक्षकों के संगठनबाजी और हड़तालबाजी बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों को हटाने का आदेश सुप्रीम कोर्ट से आया। जो साबित करता है कि शिक्षकों का नियोजन करने में सरकारें योग्यता से ज्यादा अपने वोट बैंक को तरजीह दे रही है। औसत स्कूलों में शिक्षकों की उदासीनता के कारण बच्चों की हाजिरी दिन प्रतिदिन घटती चली जा रही हैं और उनके अभिभावकों का रुझान प्राइवेट स्कूलों की तरफ बढ़ता जा रहा है।
जो इस बात का साफ संकेत है कि सरकार और जनता के संसाधनों का घोर दुरुपयोग होता चला जा रहा है लेकिन उनके मनमानेपन पर अंकुश लगाने का कोई तरीका सरकार अभी तक ढूंढ नहीं पाई है।

सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की हकीकत है की हाईस्कूल स्तर का शिक्षक प्राथमिक स्तर के साधारण सवालों को हल कर सकने में असमर्थ हैं ।इस हिसाब से प्राथमिक स्तर के शिक्षकों और शिक्षामित्रों की शैक्षणिक योग्यता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि देश के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों में पनप रही निरंकुशता और ब्लैकमेलिंग हमारी शिक्षा प्रणाली को अपंग बना रही है। शिक्षकों के इस तौर तरीकों को अगर जल्द नहीं बदला जा सका तो भविष्य में एक बड़े संकट के रूप में सरकार के सामने खड़े होंगे।

शिक्षकों की जवाबदेही तय करने वाले अफसरों का भ्रष्टाचारी रवैया उनके मनमानेपन को बढ़ावा दे रहा है। सरकारी स्कूलों के शिक्षक, प्राइवेट कोचिंग खोलकर न केवल शिक्षा व्यवस्था का मजाक उड़ा रहे बल्कि आम गरीब जनता की मजबूरियों का खौफनाक शोषण कर रहे हैं।

निकट भविष्य में आशा तो नहीं लगती कि सरकार शिक्षा माफियाओं के खिलाफ कोई बड़ा अभियान चला पाएगी। क्योंकि सफेदपोशों और रसूखदारों के संरक्षण में फल-फूल रहे इस धंधे को कोई चौपट नहीं करना चाहेगा इसलिए भी कि सरकारें उनकी पार्टी के चंदे से चलती है अगर धंधा न रहा तो चंदा कौन देगा...
सही वक्त और समय का जनता इंतजार करती है...
और डंके की चोट पर करती है...

 अश्वनी ©
          

Saturday, 29 July 2017

लालू के रोम रोम से टपकता अहंकार

"जब तक रहेगा समोसे में आलू तब तक रहेगा बिहार में लालू"
जैसे जुमलों से बिहार की जनता में।जातिवादी मूर्खता ने गहरी पैठ जमाई थी। लालू हमेशा से अहंकारी रहे हैं, उनका अहंकार उनके रोम-रोम से टपकता नजर आता था। पार्टी कार्यकर्ताओं या मीडिया से उनका व्यवहार कभी शोभनीय नहीं रहा। गरीबों के मसीहा कह जाने वाले लालू सत्ता में बैठकर जातिवाद की गहरी जड़ें बिहार में खोदते रहे। सत्ता का नशा उन्हें इतना मदहोश कर गया कि वह अपने घर तक को खोदने से परहेज नहीं कर पाए। चारा घोटाले के बाद भी बिहार का जनादेश लालू को अनदेखा नहीं कर सका। ये सिर्फ और सिर्फ लालू के जातिवादी राजनीति का प्रभाव था।
यादवों में लालू का नशा सिर चढ़कर बोलता था।
लाठी और भैंस वाली कहावतों से लालू अपने समर्थकों और जाति के लोगों को कानून का पालन ना करने के लिए अप्रत्यक्ष रुप से उसकाते रहते थे।
Image result for lalu corrupt image
समय बदला बिहार की जनता जागरूक हुई और उसने लालू की सत्ता को उखाड़ फेंका। नीतीश कुमार विकास पुरुष साबित हुए। बिहार के विकास के लिए उनके प्रयासों के बदौलत उन्हें दोबारा सत्ता हासिल मिली और लालू कहीं दूर-दूर तक नजर नहीं आए।
बाद में एक बार फिर बीजेपी से मतभेद के कारणों के चलते धुर विरोधी नीतीश और लालू एक साथ आए, दोनों ने सरकार बनाई लेकिन लालू ने इस बीच अपने दोनों लाल को सत्ता में लैंड करा दिया। इधर अपनी लाडली को राज्यसभा की सदस्यता भी दिलवा दी।
लेकिन लालू प्रसाद यादव ने अपने मुख्यमंत्री काल में और बाद में रेल मंत्री रहते हुए जितने भी घोटाले और भ्रष्टाचार किए वह देश के माथे पर निश्चित रूप से एक राजनीतिक कलंक के रूप में साबित होंगे।
Image result for lalu with lathi imageपारिवारिक हित के लिए देश और राज्य को लूटना लालू के लिए बहुत आसान रहा है फिर भी भ्रष्टाचार के सहारे वंशवाद के लिए राजनीतिक जमीन की तलाश में इस बार उन्होंने गहरी मात खाई है।
भ्रष्टाचार, अहंकार, बड़बोलापन यह सब लालू की पहचान है। बदतमीजी की मिसाल लालू को माना जा सकता है। वोटों की राजनीति चमकाने के चक्कर में पार्टी के कार्यकर्ताओं की घटिया राजनीति महागठबंधन को टूटने का अहम कारण है।

ऐसा नहीं है कि जातिवाद की मूर्खता बिहार में खत्म हो गई ! अभी भी ग्रामीण इलाकों के यादव परिवारों मैं लालू का जलवा बरकरार है! जातिवादी मूर्खता के जीते जागते उदाहरण लाठी और मूछ वाले ग्रामीण मजदूर अभी भी मिल जाएंगे जो लालू विरोध की बात सुनते ही लाठी पटकने में तनिक भी देर नहीं करेंगे। इसलिए यह समझना कि बिहार राजनीतिक रुप से परिपक्व हो गया है यह शायद विश्लेषकों की भूल है। लालू के राजनीतिक अंदाज में कोई परिवर्तन नहीं आने वाला, क्योंकि उनका अहंकार उनके रोम-रोम से टपकता है चाहे जमीन चली जाए या उनकी अकूत संपत्ति या सारा परिवार जेल की सैर करे वह बदलने वाले नहीं हैं।

भ्रष्टाचार का लत जिस इंसान को लग जाए वह तब तक नहीं बदल सकता जब तक उसका अस्तित्व समाप्त ना हो जाए!
फिलहाल लालू की मौजूदा स्थिति यही बयां करती है...

 अश्वनी ©



Wednesday, 26 July 2017

हट बे चाऊमीन !

चीन युद्ध लड़ेगा भारत से! 
सपना देख रहे हो या सावन में गांजा ज्यादा चढ़ा लिए हो! अबे चार फुटिये कुंग फू काम ना आएगा! 
युद्ध लड़ना है इंडिया से तो बेटा लड़ने से पहले सनी देओल का वीडियो देख लियो! भारतीय सेना में उससे भी ज्यादा पगलेट बैठा है!
योगा वाला शरीर है, इजराइल वाली बंदूक और कलाम वाली मिसाइल सब टेस्टेड और टंच है!
अपना वाला चला कर देख लेना पहले क्योंकि साले तुम्हारे सामान का स्टैंडर्ड इंडिया में आकर किसी से पूछ लो! पहले तो गाल पर लगाएगा फिर तुम्हारी औकात बताएगा!
युद्ध की धमकी कोरिया और जापान को ही देने में भलाई है तुम्हारी! अगर 1961 वाले भारत समझने की भूल है तो यहां सेना मौके की तलाश में बैठी हुई है!
पूंजीवाद के दम पर ताकतवर बनने की कोशिश भारत के सामने अब नहीं चलने वाली! दिमाग खोलकर समझ लो भारत में अब राष्ट्रवादी सरकार है पंडित (नेहरू) जी का जमाना गया!
ये सरकार जनता के सेंटीमेंट पर काम करती है! अर्थव्यवस्था पर बहुत घमंड है तुम्हें, भूखे मर जाओगे अगर भारत में तुम्हारा सामान न बिके तो!
सुन लो, डोकलाम तुम्हारे बाप का नहीं है! ज्यादा चूं-चपर की तो तिब्बत भी तुम्हारे असली बाप का हो जाएगा! चीनियों में इतना गुरुर कहां से आता है? क्या खाते हो बे! हाजमा सुधारो! चौमिन मंचूरियन खाना बंद करो अकल ठिकाने आएगी! भारतीय खाने को ट्राई करो उमर लंबी हो जाएगी!
Image may contain: one or more people, people standing and outdoorसुधर जाओ वक्त है, अपने रखेल पाकिस्तान को समझाओ?! लड़ने और लड़ाने की मंशा छोड़ दो नहीं तो भारत अपनी रोटी तुम पर सेंक देगा! अमेरिका ताक में पहले से है, दक्षिण कोरिया और जापान से तो तुम दुश्मनी पहले से ही पाल चुके हो।
ताइवान और भूटान पर तुम्हारा विस्तारवादी रवैया तुम्हारी सबसे बड़ी भूल साबित होगी। यह मत समझना कि अपनी सैन्य ताकत के बल पर तुम भारत को झुका दोगे!
"ध्यान रहे नेहरु नहीं यहां मोदी बैठा है! सीने पर चढ़कर तिरंगा गाड़ देगा !"
चीन के टुकडे होने में देर नहीं लगेगी! युद्ध करोगे दोनों की बर्बादी होगी! भारत हारेगा तो तुम खुद ब खुद एशिया की महाशक्ति बन जाओगे और अगर तुम हारे तो भारत महाशक्ति! पाकिस्तान इंटरनेशनल कमीना है! तुम्हारे साथ साथ वो भी सध जाएगा। 

पीओके में तुम्हारे प्रोजेक्ट पर भारत की नजर पहले से है! तुम्हारी हर कमजोरी को डोभाल अच्छे से जानता है. एक भी गोली चली सीधा पॉइंट पर हमला होगा. तिलमिला जाओगे बेज्जती हो जाएगी, भारतीय बाजार तुम्हारे लिए हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे! कहां जाओगे कमाने! कोई कमाने नहीं देगा भूखे मरोगे और फिर इंडिया ही तुम्हारी मदद करेगा! इसीलिए बदलो, जहां बैठने की जगह मिले वहां सोने लायक जगह बनाने की कोशिश मत करो नहीं तो कोई इंडियन पगलेट आएगा चढकर बैठे जाएगा! और भूल से चाउमीन वाली सड़ान्ध पाद दिया तो चार लात जमा देगा!
इसलिए संभल जाओ, सुधर जाओ, समझ जाओ. की डोकलाम न तुम्हारे बाप का था, ना है और ना होगा!
और हां अपने मंचूरियन राष्ट्रपति जिंगपिंग से बोल देना की वह माथे पर नेम प्लेट चिपका कर चले! हम लोगों को पहचानने में बड़ी परेशानी होती है की साला राष्ट्रपति कौन है और मजदूर कौन!!!
ही ही ही ही....😂😂
#भारत_माता_की_जय

 अश्वनी ©