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18 October 2017

दीपों का त्योहार दीपावली

जगमगाती रोशनी में चांद सी छटा बिखेरती मिट्टी के दिये की लौ हमारी दिवाली का प्रतीक है!
रंग-बिरंगे दीपों से मां लक्ष्मी का स्वागत किया जा रहा है! राजा रामचंद्र जी के अयोध्या वापस लौटने की खुशी हमसे ज्यादा मोमबत्ती की लौ नाच नाचकर मनाती दिख रही है।

छठ गीतों की धुन हवा में मिठास घोल रही है!
मंद-मंद ठंढ त्योहार का एहसास करा रही है! 
बच्चे स्कूल बंद होने की खुशी में झूम रहे हैं!
छोटे लौंडों का गैंग घर से पैसे चुराकर पटाखे खरीदने की जुगाड़ में लगा है! लड़कियां घरौंदा कम्पटीशन में बिजी है!

कुछ देशभक्त मार्किट में सस्ती झालड़ ढूंढ रहे हैं!
लोगों को आधुनिकता से इतना ज्यादा प्यार होने लगा है चाइनीज बल्बों के लिए पगलाए जा रहे हैं!
झमाझम रोशनी चाहिए लोगों को! देश बिके तो बिकता रहे!
ऐसे लोग ज्ञान का जलवा सोशल मीडिया पर खूब बिखेरते हैं, ज्ञान का राम रहीम और आसाराम बना देते हैं!
और साले बड़े शान से अपनी घरों में लाइट टांगकर दीवाली मनाने वाले बनते हैं!

दीया जलाओगे तो क्या रोशनी नही उभरेगी!
चीन को अपने दीवाली का दलाल नही बनाओगे तो क्या लक्ष्मी घर नही आएगी!...
हर चीज में शुद्धता बटोरते हो तो चाइनीज मूर्ति से पूजा कैसे कर लेते हो बे! शर्म कहाँ छोड़ आते हो!

अब कहोगे की भारतीय टीम से लेकर बच्चन और तेंदुलकर तक सभी ओप्पो-वीवो का चमचा क्यों बना है?
तो सीधा जबाब है कि भारतीय होने का गर्व और रुतबा पैसे से बेच डालने वालों से अपनी तुलना कैसे कर लेते हो?

हम भारतीय हैं, राष्ट्रवादी हैं!
हमारी अवकात मिट्टी के दिये जलाने भर ही है फिर भी खुश हैं! नही चाहिए झंडुओं की गुलामी! जितना है उसी में चलना सीखो नही तो औंधे मुंह देश को गिराओगे!

अब बात आती है #पटाखों की!

दीवाली प्रदूषण का त्योहार है कहने वालों पर पहले अपना हाथ सेंको, अच्छे से बजाओ!
फिर उस चिन्दी चोर के सामने जितना जानते हो उगल डालो पटाखों के विरोध में और कमीने से पूछो की
इतने साल से कहाँ पड़े थे जब पर्यावरणप्रेमी घरों में ऐसी लगा रहे थे?
जिसके कारण ओजोन लेयर की माँ बहन हो रखी है!

दुनिया मे नए साल का स्वागत पटाखे से क्यों करते हो!

पर्यावरण विशेषज्ञ की औलाद बनने वालों से कह दो की जिस तरह एसी और कार से ऑक्सीजन गैस का रिसाव होता है उसी तरह दीवाली के वक्त हमारे पटाखों से प्रकृति में स्वच्छ होती है!

मैं हमेशा पर्यावरण के प्रति बहुत गंभीर रहा हूँ! पटाखों और अन्य प्रदूषित तामझाम का विरोधी रहा हूँ! पर आए दिन लोगों को नसीहत देने वालों से मेरा सरोकार कभी नही हो सकता जो खुद पर्यावरण प्रेम के नाते कार और एसी का बेजा इस्तेमाल करते हैं!

फिर भी हम महालक्ष्मी की आराधना और उपासना मिट्टी के दीए में धरती मां की सोंधी खुशबू को महसूस करते हुए बेशक करेंगे!
हम जितने लिबरल या उद्दंड दिखते हैं उतने तो है नहीं मगर जितने नहीं दिखते इतने हैं भी नहीं!

मानवता वो सिखाने चले है हमें जिनके मन में दया ही नहीं!
नोच-नोच कर हड्डियां चूसने वालों चले हैं, ग्रीन दिवाली मनाने!

फिर भी हम सबकी सुख समृद्धि की कामना करते हैं सभी दोस्तों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं और आभार दीप जलाएं पटाखे फोड़े और #पर्यावरण का ख्याल भी रखें...
धन्यवाद...

✍ अश्वनी ©
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