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05 December 2016

कौन बचा सकता है इन चोरों-बेईमानों से...

देश के आर्थिक परिदृश्य में बड़े बदलाव की कोशिश भी इन चोरों-बेईमानों की बुद्धि के आगे नाकाम बनती जा रही है| भारत सरकार और रिज़र्व बैंक के तमाम पढ़े-लिखे बुद्धिजीवियों का ज्ञान इनलोगों के आगे फेल हो गया| नोटबंदी के फैसले में प्रधानमंत्री से ज्यादा देश की ईमानदार जनता अपना सुनहरा भविष्य देख रही थी, गर्मजोशी से बैंकों के आगे लाइन में खड़े रहकर भ्रष्टाचार को मिटा देने को अपना योगदान समझ रहा था| शुरुआत में भ्रष्टाचारियों की बेचैनी बढ़ी तो देश झूम गया| गंगा में नोट बहने की बातें आई| सरकार और रिज़र्व बैंक ने रोज नए-नए नियमें बदली, नए नोटों से बदलाव की बातें आई मोदी ने भावुक होकर समर्थन माँगा तो लगा की देश की आर्थिक हालत फिर से इसे अच्छे दिनों की तरफ ले जा सकती है|
                                                                            
Image result for black money in india imagesकालाधन वालों ने, काले कारोबारियों ने और टैक्स चोरों ने सबने मिलकर देश की उम्मीदों को धराशाई कर दिया| नेता, अफसर सभी दो-चार दिन की छुट्टी लेकर सारा माल खपा आये| नए नोटों से घूस भी लेना शुरू कर दिया मतलब इन लोगों में बदलाव की रफ़्तार नोट बदलने से भी ज्यादा तेज़ दिखी| ऊपर से सरकार का 50-50 का फार्मूला इनकी बची-खुची चिंता से निदान दिला गया| प्रधानमंत्री और वितमंत्री की काबिलियत में कैशलेस जनता का सपना तो है लेकिन इसी भविष्य की कैशलेस भारत की व्यवस्था में बेरोजगार युवाओं की एक बड़ी फ़ौज पेटीएम में बैलेंस की तलाश कर रही होगी| ऊपर से गरीब, निर्धन लोगों की स्कीम, उनके फायदे पर व्यवस्था की टेढ़ी नज़र होगी वहीँ सरकार का अमला उसे समय-समय पर परेशान करता रहेगा| प्रधानमंत्री चाहे जितने भी दावे कर लें, गरीबों के लिए गंभीर दिखें लेकिन जमीनी हकीकत उन्हें अनजान ही बना रखेगी| क्यूंकि ये सरकारी अमला कभी किसी अमीरों, रईसों के लिए बना ही नहीं| ये मासूम जनता ठगी भी जायेगी और उनके अधिकारों को सिमित भी रखा जाएगा|

गरीब पेटीएम जैसे मोबाइल वोलेट का प्रयोग करेगा ताकि फर्जीवाड़ा रुके, कालाधन समाप्त हो लेकिन कैसे? इन निर्धन लोगों की अशिक्षा का फायदा हाईटेक चोर-उचक्के आसानी से उठा लेंगे| इसलिए की एटीएम का पिन पूछ अमीरों, पढ़े-लिखों को जहाँ ठग लिया जा रहा तो हम इनलोगों के कैशलेस भारत में जीवन, उनकी दिनचर्या कैसे होगी, सोच नहीं सकते?

Image result for poor without money india imageभारत के आर्थिक सुधारों की दिशा में सरकार का हर एक कदम उन 40 करोड़ आबादी का भविष्य तय करती है जिसे कभी वोट बैंक में तब्दील कर दिया जाता रहा है तो कभी राजनीती साधने के नाम पर शोषण कर लिए जाता है| नोटबंदी वाकई एक साहसिक कदम है, लेकिन सरकार से कहाँ चूक हुई? जिसका फायदा भ्रष्टों ने भरपूर उठाया|

सवाल इसलिए भी आया क्यूंकि किसी ने अमिताभ बच्चन, सलमान, अम्बानी, लालू जैसे धनकुबेरों को बैंक के बाहर नहीं देखा| किसी ने उफ़ तक नहीं की, सब मौन साध गए| केजरीवाल, मायावती या ममता का उछलना अपवाद ही रहा| राजनीतिक मतलबों के लिए आरोप-प्रत्यारोप का मसला दूसरा है लेकिन आर्थिक सुधारों के लिए अरबपतियों पर कोई असर न पड़ना ही एक सवाल है| क्योंकि सभी को पता है की सबसे ज्यादा कालाधन कहाँ और किसके पास है? फिर भी...
प्रधानमंत्री की कोशिशों और उनके राष्ट्र के प्रति समर्पण के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद और आभार...

लेखक:- अश्वनी कुमार, जो ब्लॉग पर ‘कहने का मन करता है’ (ashwani4u.blogspot.com) के लेखक हैं... ब्लॉग पर आते रहिएगा...

14 November 2016

लूट लिया मोदी ने...

यक़ीनन मोदी ने भ्रष्टाचारियों का 70 साल का सब-कुछ लूट लिया| उन्हें नोट की जगह कागज़ थमा दी| उनकी पीढ़ियों के सुख-सुविधा के लिए जमा पूंजी बर्बाद कर दी| 8 नवम्बर की रात भारत के प्रधानमंत्री ने गुपचुप समूचे देश के बेईमानों के घर डाके डाल दिए| अमीरों का सुख-चैन छीन लिया| लोग खदबदा उठे, चिंतित हो गए लेकिन अपने प्रधानमंत्री के निर्णय, उनके इरादों का जमकर समर्थन किया| नोटबंदी का फैसला जनता के लिए भले ही तकलीफदेह हो लेकिन यह भारत की आर्थिकी में संजीवनी का काम करेगा और नए आर्थिक आयाम भी सिद्ध होंगे| लोग बैंकों की लम्बी कतारों में खड़े होकर भी देश की आर्थिकी की चिंता करने लगे हैं जो पहले राजनितिक संभावनाओं के लिए चायों की दूकान तक सीमित थी|

देश वाकई में तभी गंभीर, समझदार या ईमानदार बनता है जब उसे चलाने वाले देश के लोगों के उज्जवल भविष्य के लिए ईमानदारी दिखाए, गंभीर हो| भ्रष्टाचार, बेईमानी से कमाया धन भले ही चंद लोगों को सुकून देता हो मगर ईमानदारी की राह पर चलने वाले लोगों के वर्तमान में मोदी हैं, उनकी व्यवस्था में नोटबंदी जैसे फैसले भी हैं और भ्रष्टों को मिटा देने की सनक भी है| ये सोंच, ये गंभीरता और व्यवस्था में कायापलट की जरूरतों के बलबूते समाज बेशक नई ऊचाईयों पर जाएगा| अगर सब कुछ ऐसा ही होता रहा तो वो दिन भी दूर नहीं जब लोग अपने हक़ के लिए कमाएं, मानवता में यकीन करें और देश को अपना परिवार समझें| ये थोडा कठिन है पर असंभव भी नहीं|

नोटबंदी का व्यापक असर निश्चित तौर पर आम जन जीवन पर पड़ा है| लोग 500, 1000के नोट लेकर सड़कों पर भटक रहे हैं| घरेलु महिलाओं की बचत के बैंकों में आ जाने मात्र से ही देश की आर्थिकी में मुद्रा का प्रवाह काफी बढ़ जाएगा| बैंकों, एटीएम के बाहर लगी शांतिपूर्ण लाइनों से लोग इस फैसले को सहजता से स्वीकार भी कर रहे और मोदी को इस फैसले के लिए बधाई भी दे रहे| बड़े नोटों की जमाखोरी और नकली नोटों के चलन से न केवन हमारी विकास रफ़्तार में बाधा पहुँच रही थी बल्कि देश के अमीरों-गरीबों के बीच आय में गहरी खाई उत्पन्न हो गई थी| इसलिए भी की लोग पैसों के लिए शॉर्टकट का इस्तेमाल करते हैं| यही शॉर्टकट का प्रयोग लोगों को अथाह, अनगिनत पैसे-साधन तो उपलब्ध तो करा देता है लेकिन उनका जीवन अशांत हो जाता है| मन में पैसों का डर बैठ जाता है| सरकार और उसकी व्यवस्था को ठेंगा दिखाया जाता है और अंततः देश ऐसे लोगों से कराह उठता है और जनता मोदी जैसे को आगे लाने की जरुरत महसूस करती है|
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आम जनता में कुछ लोग बेईमान जरूर हैं पर ख़ास लोगों में नेताओं और उनकी पार्टियों का बेईमानी पर कॉपीराइट है| नेता, अफसर, जमाखोर ही सबसे ज्यादा उत्पात मचाते हैं, लोगों को लुटते हैं लेकिन इस बार उनकी लुटी है और आम जनता मज़े ले रही है, तालियाँ ठोंक रही है| नगद लेन-देन के बलबूते चल रहे नेताओं और पार्टियां औंधे मुंह गिरी है| मोदी के फैसले के साथ समूचा देश खड़ा है, उन्हें जनता से वाहवाही भी मिल रही है और ऐसा प्रधानमंत्री पाने का सौभाग्य से उन्हें आशीर्वाद भी|

देश भविष्य में और भी होने वाले सख्त निर्णयों को झेलने के लिए तैयार खड़ा है| देश बदल रहा है... यक़ीनन देश बदलेगा, हम भी बदल रहे हैं... यक़ीनन हम भी बदल जायेंगें... ईमानदार हो जायेंगे...


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लेखक:- अश्वनी कुमार, जो ब्लॉग पर ‘कहने का मन करता है’ (ashwani4u.blogspot.com) के लेखक हैं... ब्लॉग पर आते रहिएगा...