01 July 2020

● बाबा रामदेव बनना आसान नहीं ●

क्या हम कभी ये कल्पना कर सकते थे की कोई भगवा चोला पहने बाबा खुद ही कंपनी का डायरेक्टर, प्रोड्यूसर हीरो बनकर हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी तमाम दिग्गज कंपनी को ठिकाने लगा देगा ? 
स्वामी रामदेव योग के बदौलत दुनिया में स्टारडम हासिल कर चुके हैं, वो योग जिसे कभी मूर्ख भारतीय ही मज़ाक समझा करते थे ! यूँ दाढ़ी बढ़ाकर, एक आंख छोटा करके स्वदेशी होने का हुँकार भरते बाबा इस देश के रियल आइकॉन हैं ! 


हमें ऐसे लोगों का बेशक अनुसरण करना चाहिए, जो सादगी-शिष्टता से राष्ट्र का संरक्षण कर रहा हो ! आसान नही है कि राजनीतिक प्रतिद्वंदिता झेलकर या सरकार से लड़कर एक सामान्य व्यापार भी आप चला लें, मगर बाबा ने यहां स्वदेशी साम्राज्य खड़ा कर डाला !
स्वामी रामदेव अब अम्बानी, अडानी जैसे उधोगपतियों की सूची में खड़े हो चुके हैं ! ये सच भी है कि आज आयुर्वेद की स्वीकारिता लोगों के बीच होने की वजह बाबा रामदेव हैं ! 
जिन्होंने लोगों में अपनी योग और आयुर्वेद के बदौलत विश्वास कायम की !


कोरोना काल में हमें बाबा रामदेव से ऐसे ही किसी चमत्कार की उम्मीद थी ! कोरोनिल पर मेडिकल माफियाओं ने जितना भी उछल कूद मचाया हो, लेकिन बाजार में पतंजलि स्टोर की अपनी विश्वसनीयता है ! लोग इसे हाथों हाथ लपक लेंगे... 
स्वामी रामदेव की यह विश्वसनीयता उनके अथक परिश्रम का परिणाम है... 


हमें तो गर्व करना चाहिए कि भारतवर्ष में ऐसे ऐसे योद्धा फिर से पैदा होने लगे हैं जिनके सनातन ज्ञान-विज्ञान के आगे दुनिया नतमस्तक होने को मजबूर हो रही है...

18 June 2020

● माटी के लाल हैं ये ●

जहाँ देखे फौरन जय हिंद के उद्द्घोष के साथ सैल्यूट करें ! ये मनोबल ही उनके रक्त में उबाल रखेगा...
किसी भी आर्मी के परिवार को कोई दिक्कत हो फौरन हमें मदद करना है ! बस, ट्रेन, एयरपोर्ट कही भी कोई जवान दिखे पूरे सम्मान के साथ सीट पर बिठायें ! 
आसान नही है मित्र सैनिक होना... 


5 से 6 डिग्री में लूज़ मोशन हो जाता यहां, जबकि -40°C में बंदूक के साथ 40 kg वजन लेकर कोई महामानव ही खड़ा रह सकता !
इन्होंने 17000 ft की ऊंचाई पर लड़ाई लड़ी है ! जहां आप आसानी से सांस नही ले सकते वहाँ हमारे वीरों ने स्वाभिमान बचाया है ! युद्ध में गिनती गिनना कायरता मानी जाती है, बस परिणाम देखा जाता है ! सिकंदर के विशाल फौज के साथ पोरस का युद्ध हुआ था, पोरस की बहादुरी से डरकर विश्वेजेता की सेना ने आगे ही बढ़ने से मना कर दिया !


चीन की अवकात ही क्या है ? दुनिया का एक मैनुफैक्चरिंग हब बस ! 
कितनी युद्ध लड़ी है चीन ने 1962 के अतिरिक्त ? वो भी भारत की थल सेना से जिसका राजनीतिक नेतृत्व फट्टू और कमजोर लोगों के हाथों में था ! मार्शल आर्ट और कुंग फू के सिनेमैटिक एक्शन से युद्ध नही जीते जाते 4 फुटिये ! जिगरा चाहिए जिगरा !
तो सुन, ये वो भारत है जिसकी प्रतिदिन कश्मीर में युद्ध चलती है ! हमारी फौज हर दिन युद्ध करते करते पारंगत हो चुकी है ! 


यूँ नही हमारे 20 तुम्हारे 40 पर भारी पड़े ! 
हमें युद्ध का तनिक भी भय नहीं, वीर जन्मती है यहाँ की माताएं ! तिरंगे में लिपटे लाल को सलामी देती है... पिता पोते को भेजने की कसमें खाता है ! उस वीर की वीरांगना वर्दी पहने फिर लड़ने आ जायेगी... तब क्या करोगे तुम !
साम्यवादी मंसूबों को चीन तक रखो तो बेहतर है ! 
तिब्बत, अक्साई चीन की कसक हर हिंदुस्तानी के दिल में है ये याद रखना !
और हमरे भोले बाबा को कैलाश... अरे पैदल चल देंगे बाबा के दर्शन को... तांडव हो जाएगा पगले !!!
#जय_हिन्द 🇮🇳🇮🇳🇮🇳

28 May 2020

बिहार बोर्ड का गिरता स्तर

बिहार बोर्ड मैट्रिक का रिजल्ट आया ! फिर एक गुदड़ी के लाल ने शिखर पर झंडा लहरा दिया !
बात पढ़ाई की हो और उसमें बिहार का नाम होना ही अपने आप में एक भौकाल है !
आज भले ही बिहार बोर्ड में सफलता का प्रतिशत बहुत अधिक जबरदस्ती कर दिया गया है ! लगभग सारे बच्चे पास कर दिए जाते हैं ! पहले कराए जाते थे और अब कर दिए जाते हैं ये अंतर पिछले 10-12 सालों में आया है !


पहले ढ़िबरी और लालटेन में पढ़कर बिहारी लौंडे कभी आईएएस और आईपीएस की फैक्ट्री इसी बिहार को बना देश में महफ़िल लूट ले जाते थे, जो आज प्रवासी मजदूरों की फैक्ट्री बन गई है !
बात दिमाग की हो बात बुद्धिमानी की हो तो अव्वलता हमेशा बिहार के दर्जे में ही आएगी ! 100% यूनिवर्सल ट्रुथ है की अगर अंग्रेजी लटके झटके, यो यो हनी लुक से इतर सिर्फ प्रखरता, बुद्धिमानी को पैमाना माना जाए तो कोई आसपास नही टिकता !
लगभग अधिकांश प्रतिष्ठित जॉब भोजपुरी एक्सेंट मिक्स अंग्रेजी बोलने वाले लौंडे ले उड़ेंगे ! यूँ गद्देदार घूमने वाले कुर्सियों पर बैठे, गले में गमछा डाले हम बिहारी मुखातिब हो जाएंगे !
बिहारियों के अंदर प्रतिभा का ह्वास इधर 10-12 सालों से बहुत अधिक होने लगी है ! मतलब सोचिये कि जिस राज्य को ना बिजली नसीब हो, सड़क, टेलीविजन, रेडियो,अच्छी किताबें, अच्छे स्कूल इन सबों से दूर-दूर तक कोई वास्ता ना हो उसके बावजूद भी यह हमारा स्वर्णिम बिहार यूपीएससी का झंडाबरदार हुआ करता था ! 


बिहार बोर्ड का अपना जलवा था भाई ! 20 से 30 फीसदी सक्सेस रेट होता था मैट्रिक में पहले ! थर्ड पास होने वाला सीना तान कर 10 गांव में जा सकता था !
परंतु बदलते परीक्षाओं के पैटर्न ने बच्चों के अंदर पढ़ाई की जगह सिर्फ अंक आधारित बना कर रख दिया ! हम CBSE के नक्शेकदम पर क्यों चलने का प्रयास कर रहे हैं ? घोड़े की तरह इनका नाल क्यों ठुकवा रहे ?
आज क्या हम अधिकांश बच्चों को जबरन पास नही करा रहे ! 
उसमें भी इतनी बेहद निम्न स्तर की परीक्षा प्रणाली जिसमें सिर्फ बिना बौद्धिक ज्ञान को समझे-परखे सिर्फ ऑब्जेक्टिव प्रश्नों के सहारे उसे जबरदस्ती पास कर दिया जा रहा ! क्या यह हमारी जड़ों को खोखला नहीं कर रहा ?


किस आधार पर हम 15.5 लाख में कुल 80.59% छात्रों को धकेलकर आगे बढ़ा रहे हैं ? स्कूलों की बदहाली और शिक्षकों की अयोग्यता को ढकने का ये प्रयास गंभीर चुनौती खड़ी करेगा !
मतलब साफ है कि हम अपने भविष्य को पढ़ने को प्रेरित करने, बौद्धिक समझ विकसित करने की जगह उसे बेरोजगारी के इस दुष्चक्र में फंसाने का तानाबाना बुन रहे !


बिहार के पास है ही क्या खोने को, बचा जो झारखण्ड को दान कर दिया, कुछ भैंसिया चारा खा गई और बाकी तमंचे के दम पर नाम बुरा डाला ! अब प्रवासी बनकर इधर उधर लतियाये जा रहे ! एक ही तगमा था प्रतिभा का, दिमाग का, बुद्धि का वो भी खत्म करने के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया गया है...

22 May 2020

बिहार बेकार है क्या ?

#Industryinbihar 
हमारा अनमोल बिहार बेकार है क्या ? इस लॉक डॉन में बिहार के प्रवासी मजदूरों कि जो हकीकत मीडिया के माध्यम से हम तक पहुंची उसने हमारे रोंगटे खड़े कर दिए !
वाकई देश को राजनीति का पाठ पढ़ाने वाला बिहार क्या राजनीतिविहीन हो चुका है ? क्या रोजगार और मजदूरों के मसले पर हमारा प्रदेश बिल्कुल असक्षम हो चुका है ? 
15 साल हमने एक पिछड़े के नाम पर बागडोर सौंपी लेकिन उसने दगा दिया तो हम बिहारियों ने पलटवार करते हुए एक साफ-सुथरी छवि वाले जमीनी नेता को बिहार के सिर पर विराजा !
मगर इन 15 सालों में राजनीति, वाहवाही के अलावा रोजगार और उद्योग धंधों के मसले पर कोई खासी प्रगति दिखाई नहीं दी !

लोग यूं ही ट्रेनों में शौचालय तक में भर भर कर दिल्ली मुंबई सूरत कमाने जाते रहे! बिहार की श्रम शक्ति दूसरे राज्यों की तरक्की में अपना खून पसीना सींचती रही ! लेकिन शायद केंद्र और राज्य सरकार को इसकी कोई भनक तक नही थी ! 
अपना पेट भरा हो न साहेब तो दूसरे की भूख की आह सुनाई नही देती !
मान लिया हमने कि आपकी पिछली सरकार जिन्होंने 15 साल बिहार में राज्य किया उसने लूट खंसोट कर उद्योग धंधों समेत लगभग तमाम रोजगार की संभावनाओं को खत्म कर दिया ! 
मगर आपने इन 15 सालों में उसे जीवंत करने की कोशिश क्यों नहीं की ? 
झारखंड का बंटवारा हुआ, सारे प्राकृतिक खनिज संसाधन झारखंड के हिस्से चले गए और बिहार को ठेंगा मिला !

चूंकि बिहार एक लैंडलॉक्ड स्टेट है सो कोई व्यापारिक कंपनियों के यहां उद्योग धंधे बसाने की कोई संभावना है दूर-दूर तक तो दिखती नहीं है !
टैक्स में कोई छूट देते नही हो आप ! दारूबाजी की तिकड़म में राज्य का खजाना खाली कर चुके हो ! नौकरियों में स्थानीय आरक्षण लागू करने की जगह गैर बिहारियों को खैरात बाँट रहे हो !
नौकरी दी भी कितनी है शायद नौकरियां बिहार में खरीदी जाती है !
100 तरह की योजनाएं बना डाली ! 
नाली गली पेयजल, ये निश्चय वे निश्चय, मगर लांग टर्म रोजगार कहाँ दी ये बताइये ! मनरेगा में मजदूर काम कर रहा लेकिन 2 महीने में सड़क बन गयी, नहरें तालाब खुद गयी फिर.... बेरोजगार बना दोगे ! ये मजदूरों के पलायन की मुख्य वजह यही है !
उद्योग-धंधे को बढ़ावा नही मिल रहा ! 
आदमी कहाँ जाए... ? 
प्रति व्यक्ति आय न्यूनतम है महाशय यहां की ! केंद्र क्यों सोचेगा आपको स्पेशल स्टेटस के लिए ? माइग्रेंट्स वर्कर्स यहाँ की ताकत है ! अब यूज़ कीजिये, ये कोरोना शायद बिहार के लिए गेम चेंजर साबित हो ! नही तो बिहार पिछला था, है और आगे रहेगा इसकी भी संभावनाएं प्रबल है !

मजबूर कीजिये उद्योगपतियों को !
एक बेहतर रणनीति तैयार करनी होगी बिहार के किसी हिस्से में एक बड़ा सा स्पेशल इकोनामिक जोन बनाना होगा, केंद्र सरकार को इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है !
इसलिए कड़े नीतिगत फैसले लेने की जरूरत है राज्य के स्तर पर ! मगर बिना केंद्र के तो संभव नहीं दिखाई देता है !
राज्य का राजस्व बहुत ही खराब और दयनीय स्थिति में है !शराबबंदी से कुछ हासिल नहीं कर पाए सिवाए वाहवाही के मगर अब सोचना होगा !
बैंकों से जबरदस्ती कर्ज दिलवाइये उद्योगों को ! यहाँ के लोगों के जमा पैसे से अन्य राज्यों के उद्योगपतियों को लोन देकर NPA करवा ले रहा ! यहां की जमा राशि की तुलना में पैसे देने के लिए बाध्य कीजिये ! सारी लाईसेंस व्यवस्था ऑनलाइन करिये !

सड़कों पर पैदल चलती हमारी श्रम शक्ति और इस देश की आन बान और शान नारी शक्ति जो अपने बच्चे को बैग पर लादकर नंगे पांव सड़कों पर चलती दिखी क्या यही हमारे हिंदुस्तान में बिहारियों का अस्तित्व है ??? 
#Indusryinbihar

01 May 2020

बिहार अभी जिंदा है...


बिहारी जो अपनी मेहनत से सींचता है हमारी अर्थव्यवस्था को, तराशता है अमीरों के हर शौक को ! मगर वो बेबस ही क्यों होता है ??
मजबूरी उसे अशिक्षित पैदा करती है और जीवनपर्यंत अशिक्षित ही छोड़ देती है ! गरीबी उसमे भूख पैदा करती है और हमारा सिस्टम जब उसे भूखा ही छोड़ देता है तब यही मजदूर शब्द खलनायक बनकर मानवता को जलील करता है !


ये जो आजकल अपने सिर पर बोरे लादे, कंधे पर बैग टाँगकर दिल्ली से बिहार की तरफ कूच कर रहे हैं न, यही हमारे राष्ट्र के कर्ताधर्ता हैं !
हमारे बच्चों के खिलौने, आइसक्रीम के शौक यही तो पूरे करते हैं ! हमारे घर बनाने के अरमानों को यही तो तराशते हैं !

जिस जीडीपी के नगाड़े हम दुनिया भर में बजाते हैं न, ये उसके सिरमौर हैं !
माथे पर रखी इनकी गठड़ी, उनके अंदर भूख से हाँफ रहा हुनर और आंसू बनकर छलक रहा खौफ देखकर पत्थर भी पिघल गए...
शब्दविहीन कर दिया इस दृश्य ने !


अमीरों के ईमान को तार तार कर दिया, जो इन मेहनतकश को दो रोटी खिला रख नहीं पाए ! किस बात का मेट्रोसिटी.. किस चीज की आधुनिकता ? उस शिक्षा का क्या फायदा जो आपने कान्वेंट से लाखों खर्च कर ली ? जो दो वक्त की रोटी की गारंटी नही दे पाए !


ये अशिक्षित हैं मगर मूर्ख नहीं ! इनके बाप दादाओं ने आपके जैसे संपत्ति छोड़ नही गए थे ! खैरात पर नहीं पले ! मजदूरी कर बीबी बच्चों का पेट पाला !
ये आपके जैसे विदेश घूम कर बीमारियां नही लाते ! ये इसी मिट्टी पर आपकी फ़ैक्टरियों में मेहनत करते और बस जिंदा रहते हैं !

इनकी वजह से आपका चकाचौंध है.. ओला, उबेर, रेस्त्रां है.. आपकी मंडी है.. आपके बच्चे का स्कूल बस है.. आपकी सोसाइटी की सुरक्षा है.. आपके बन रहे फ्लैट्स हैं.. और इनके दम पर आपकी फैक्ट्री चल रही..
मगर आप कायर निकले !


ये मजबूर हैं, पता हैं क्यों ? क्योंकि ये राजनीतिक महत्वकांक्षा के शिकार हुए लोग हैं.. राजनीति ने इनके बिहार को लहूलुहान कर रखा है ! इनके अधिकारों का गला घोंट दिया गया है..
ये बुद्ध की धरती से हैं, नालंदा विश्विद्यालय के प्रकाश से प्रस्फुटित अतीत के वंशज हैं ये !


आकर देख लो बिहार की सड़कों पर.. मानवता की सेवा कैसे की जाती है !! दया, करुणा हर बिहारी में जिंदा है.. अभी बिहारी नौजवान जिंदा है...

---30/03/2020---

India's Coronavirus Lockdown Leaves Vast Numbers Stranded and ...

22 March 2020

बिहार दिवस

आज बिहार दिवस है ! 
देश की मिट्टी को पसीने से सींचने वाले राज्य का दिवस है ! मेहनत के उजाले में भारत की आर्थिकी को गति देने वाले बिहारियों का गौरवगान है ! 

अपनी मेहनत, बुद्धिमता और लगनशीलता से दुनिया में परचम लहराने वाले कि धरती है मेरा बिहार !
बिहार का वह गौरवशाली अतीत जहाँ से ज्ञान का प्रकाश प्रस्फुटित हुआ ! 

बुद्ध और महावीर की धरती... सम्राट अशोक की नींव पर खड़ा... और बापू के आह्वाहन की कर्मभूमि... ओह यह मेरा बिहार है...

शानदार... जबरदस्त... जिंदाबाद...

अपने बलबूते राजनीति के शिखर पर शंखनाद करता है यह बिहार...
देश की आर्थिकी की डोली को अपने कंधों पर ढोता कहार है बिहार... 

जाहिलों से खतरा

पहली बार इन विशिष्ट क्लास लोगों पर खतरा मंडराया है ! 
घूमो विदेश, करो अय्याशी, लुटाओ हराम से कमाए पैसे... रोका किसने है ? मगर तुम जाहिलों की बड़ी फौज से इस देश को खतरा है ! 
कचरे वाली गाड़ी देखकर मुंह रुमाल से ढक लेते हो ! सफाईकर्मी बगल से गुजर जाए तो टेढ़े लँगड़े होकर 2 फूट का डिस्टेंस मेन्टेन करते हो ! होटलों रेस्टुरेंट में बेचारे निरीह वेटरों को डाँटते हो ! किसी भी लाइन में लगना तुम्हे पसन्द नहीं ! टैक्स की डकैती करते हो ! 
अंग्रेजी की बदबूदार गंध मचाते फिरते हो !

किस बात का इलीट क्लास बे ! थोड़ी भी लज्जा बची है क्या तुममे ! थोड़ा भी सेंस लेकर पैदा नही हुए क्या ? देश का प्रधानमंत्री हाथ जोड़ रहा है, घरों में रहने की विनती कर रहा है ! मगर तुम ठहरे असली गंवार ! अंग्रेजी स्कूलों वाले हो न इसलिए मास्टर का सोंटा नही पड़ा कभी, माँ बाप का झापड़ नही खाये हो ! संस्कारहीन हो एकदम इसलिए अक्ल से पैदल तो रहोगे ही !

ये अंग्रेजियत की बदबूदार बास हम लोगों के सामने मत निकलना कभी ! सारा नाबाबशाही निकल जायेगा... 
जिम्मेदार बनो... नही तो बेमौत मारे जाओगे...
तुमसे कोई सहानभूति नही मगर तुम्हारे कारण इस देश की मासूम जनता संकट में है... इसलिए बता रहा... सुधर जाओ... 
अकड़गिरी नही चलेगी ! कुत्ते की मौत मारे जाओगे... 
#जयहिंद 

16 March 2020

डंडे की ताकत


Image may contain: 2 people, people standing, people walking and outdoorअनुशासन का मूल सख्ती है ! भय इंसान को अनुशासित करने का प्रयत्न करती है ! अनुशासन के बल पर उद्दंडता की समाप्ति की जा सकती है ! दुनिया के तमाम देशों की बेहतरीन सेनाएं अनुशासन के बदौलत ही समस्याओं को आसानी से फतह कर डालती है !

सशस्त्र सेनाओं की ट्रेनिंग के दौरान ट्रेनर के डंडे का बेहद अहम रोल होता है ! यह डंडा तराशता है हमारी फौज को और उन्हें वीरता निडरता से सिंचित करती हैं !
सशस्त्र बलों का तगड़ा अनुशासन और ट्रेनिंग का परचम बॉर्डर पर बिखरता मिलता है ! इन्हें चट्टानों से फौलाद बनाया जाता है !
वीरता की अग्नि में तपकर रियल हीरो की माफिक बैटल्स ग्राउंड में जलवा दिखाते हैं !
सरकार हम पर शासन कैसे करती है ?
सीधी एवं सरल शब्दों में कहें तो पुलिस के माध्यम से !
लोग पुलिस से क्यों डरते हैं ?
लोग पुलिस ने नहीं बल्कि उसके डंडे से डरते हैं, कानून के प्रावधानों से डरते हैं !अराजकता को दूर करने का सबसे साधारण उपाय है सख्ती बरतने का ! कानून एवं उसके प्रावधान, सरकारें डंडे के बल पर नागरिकों पर लागू करती है ! अन्यथा अव्यवस्था का वातावरण कुव्यवस्था को जन्म देगी निश्चित तौर पर हिंसा पर ही समाप्त होती है !

जैसे हम कुत्ते जैसे जानवरों को अगर ट्रेंड कर 'स्निफर डॉग' बना सकते, घोड़े को नियंत्रित कर सशस्त्र दस्ते में शामिल कर सकते, तो मनुष्य जैसे समझदार प्राणी को व्यवस्था के साथ चलने को बेशक बाध्य कर सकते हैं ! मगर बिना भय के प्रीति नहीं होती !
सामान्य तौर पर हम देखें तो अगर बच्चे को डांट-मार ना पड़े तो वे बेशक अनियंत्रित होकर असामान्य व्यवहार करेगा ! आजकल के युवाओं में पनप रही इस गतिविधियों के जिम्मेदार उनके लालन-पालन करने वाले हैं !
चूंकि चाणक्य कहते हैं कि पहले 5 वर्ष बच्चे को खूब दुलारना चाहिए, 5 से 13 वर्ष तक कठोर अनुशासन में सभी संस्कार सिखा दो और फिर मित्रवत व्यवहार करना चाहिए !
जो लोग बच्चे में अनुशासन पैदा करने के प्रयत्न को हिंसा का नाम देते हैं वे निश्चित तौर पर ही किसी पाश्चात्य विकृति का शिकार है ! नहीं तो भारत जैसे विकासशील देश कुल बजट का 20% रक्षा पर क्यों ख़र्चता है ?
दुनिया के तमाम देशों के बीच हथियारों की खरीदी की होड़ क्यों लगी रहती है ?
मतलब शासन का मूल ही अनुशासन है !

प्राचीन राजाओं और आज तक की सरकारें डंडे के बल पर ही शासन करते आएं हैं ! विदेशी आक्रमणकारियों की आततायी बर्बरता ने ही भारतवर्ष जैसे गौरवशाली अतीत को कलंकित किया है !
मगर शासन करने का मूल उद्देश्य मात्र व्यवस्था स्थापित करने से नहीं है बल्कि नागरिकों की जरूरत की पूर्ति हेतु राजस्व संग्रह से भी है !
जिस देश की पुलिस मजबूती से देश के अंदर शांति स्थापित रखती है वह राष्ट्र उतनी ही तेज प्रगति कर सकता है !

भारत के परिपेक्ष में यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जहां एक पुलिसकर्मी पर लगभग 663 नागरिकों का दायित्व है !
कुल 130 करोड़ की विशाल आबादी एवं सुदूर भौगोलिक विविधताओं के बावजूद भी हम प्रगति कर रहे हैं तो स्पष्ट है कि हम सभ्य नागरिक होने का दायित्व बखूबी निभा रहे हैं चाहे डंडे के डर से निभा रहे हैं या इंसान होने के नाते मगर निभा जरूर रहे हैं...
धन्यवाद !!!

प्रकृति से पंगा #कोविड19

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हम आधुनिक हैं ! स्मार्ट, इस धरती पर रहने वाले सभी प्राणियों में सबसे स्मार्ट ! हम पहाड़ तोड़ सकते, नदियों का रास्ता बदल सकते, बांध बनाकर पानी रोक सकते, जंगलों को उजाड़ कर आलीशान महलें बना सकते, मूक जानवरों को मिर्च मसाला लगाकर बड़े चाव से खा सकते हैं !
हम इंसान हैं ! इतने शक्तिशाली की शेरों को मार सकते हैं मगर मशीन के सहारे !

बिना बुद्धि का इस्तेमाल कि हम साधारण टिड्डे से भी सामना नहीं कर सकते ! मानवीय चेतना का बेजा दुरुपयोग वह भी प्रकृति के सामने, मगर ध्यान रहे यह प्रकृति तुम्हारे कारण नहीं बल्कि प्रकृति से तुम हो !
प्रकृति शाश्वत है ! हम इसे जितना नुकसान पहुंचाने का प्रयत्न करेंगे उतने गंभीर परिणाम भुगतने होंगे !
आधुनिकता एवं विकासवाद की आड़ में विकसित देशों ने प्रकृति को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी ! प्रकृति को नियंत्रण में लेने की कोशिश ने आज दुनिया की लगभग आधी आबादी के ऊपर कोरोना वायरस ने संकट में डाल दिया है !

एक वायरस के कारण 'ग्रेट शहंशाह अमेरिका' में इमरजेंसी लग गयी है ! दुनिया का मैन्युफैक्चरिंग ग्राउंड 'द ग्रेट चाइना' बर्बादी के कगार पर खड़ा हो गया है ! चीन की अतिबुद्धिमता का दम्भ समूचा संसार भुगत रहा है !
उसके जाहिलपने से यूरोप अघोषित जंग लड़ता दिख रहा है ! पूरे एशिया में खौफ का माहौल है ! प्रकृति के सिर्फ एक चोट से पूरा विश्व कराह उठा है !
अरबों खरबों डॉलर डूब चुके हैं, अर्थव्यवस्था बेहाल हो चुकी है ! जनजीवन बेजान हो चुका है !

क्या यह मनुष्य के उन पापों का प्रायश्चित नहीं जब हम निरीह जानवरों का आशियाना उजाड़ डालते हैं फिर उसे पिंजरे में बंद कर तरह-तरह की लजीज रेसिपी व्यंजनों के नाम से परोस डालते हैं ! खाकर डकार लेता मानव किस आधार पर इंसान कहे जाने का हक रखता है ?
दुनिया के सबसे शक्तिशाली एवं शानदार शिकारी शेर जैसे जानवरों को बाड़े में डाल अदब से चिड़ियाघर (zoo) का नाम देते हैं ! उसे उसकी पारिस्थितिकी, खाद्य श्रृंखला से मनोरंजन मात्र के लिए मशीनों के सहारे विस्थापित कर डालते हैं वह भी बिना सोचे !
क्या हम पेड़ों को काटने से पहले इस अबोहवा में उसके योगदान के बारे में तनिक भी सोचते हैं ?
क्या हमने आसमान में स्वच्छंद विचरण करने वाली पंछियों के बारे में कभी सोचा ? चुंबकीय तरंगों से हमने लगभग समस्त पंछियों का अस्तित्व पर ही संकट पैदा कर दिया है !

अगर किसी आधुनिक मनुष्य से इन सवालों का जवाब बेहद ईमानदारी से देने को कहा जाए तो निश्चित है निरुत्तरता में बेजुबान साबित होगा !
हमने गलत किया है ! बहुत गलत !
इस प्रकृति को हमने नियंत्रित करने का साहस किया है !
उसे अपने इशारों पर चलाने की जुर्रत की है ! यह ठीक वैसा ही है जैसे टहनियों में लगा फल पूरे वृक्ष को अपने अनुसार झूमने को विवश कर रहा हो !
कोरोना वायरस मनुष्य की जघन्य करतूतों की महज बानगी है !

प्रकृति शाश्वत है ! हम प्रकृति से हैं ! हमारी जरूरत है प्रकृति से पूर्ण होती है !
अतः मानव अपने सीमित दायरे में रहकर ही अपनी बुद्धिमता का नंगा नाच करे वही बेहतर होगा !


अनकहा इश्क


प्रेम इस संसार का सबसे सुखद एहसास है !
यह एहसास आंखों से शुरू होकर दिल की जज्बातों की भीतर बेहद आसानी से उतर जाती है ! तब होता है एक अकल्पनीय और आभासी व्यक्तिगत से परिचय !

दुनिया में स्त्री और पुरुष की रचना मात्र से प्रकृति की इतिश्री नहीं होती ! रोमांच और नाट्य से भरपूर प्रेम रस की मौजूदगी फिजाओं में मिठास घोलती है ! तन बदन सिहर कर रह जाता है ! नसों में स्फूर्ति आ जाती है और यौवन निखर कर रह जाता है !
इश्क का मतलब लौंडे का आशिकी में डूब जाना है ! असली प्यार वो है जो लड़की से बिना बात तक किये अपना मान लेना है ! उसके सामने जाने में घिग्घी बंध जाए तो समझ लो आधा आशिक हो चुके हो !
प्यार बेशक नजरों से शुरू होती है मगर उसकी मदहोशी में लौंडा शायर बनकर रह जाता है !

ये इश्क बेजुबान है ! ये खुद में एक साहित्य है जिसका रचनाकार नायक खुद होता है !
लड़की से नज़रें न मिला पाना सफलता है अनकही इश्क की !
अब आते हैं असली मुद्दे पर...
तेरे नाम टाइप हेयर कट और सिगरेट फूंकना फैशन था आशिकों का ! प्यार और इश्क की तमीज हुआ करती थी ! अपने प्यार की इज्जत करना पहला कर्तव्य हुआ करता था ! कॉन्फिडेंस कि व्यापक कमी होती थी ! खतों के सहारे भावनाओं का आदान प्रदान किया जाता था !

नजरों नजरों में बातें होती थी और उसकी मुस्कुराहट... ओह... लौंडा अगले महीने तक ख्यालों में डूबा रहता !
बालों में तेल, बाजू का खुला बटन और बदन पर मैगनेट सेंट ! ये श्रृंगार आशिकों का फेवरेट होता था !
लड़की को पता भी नही और यहाँ महाशय मेले में जाकर उसकी नाम का टैटू गुदवा आते थे !
दोस्तों की देखरेख में प्लान सेट किया जाता ! हर एक दिन उससे बात कर डालने की शपथ खाई जाती !
अगर आपने कभी प्यार किया और सामने जाने में फट गई तो इश्कबाजी में अव्वल दर्जे के खलीफा रहे हैं आप !
लड़की के सामने ही अगर साईकल का चेन उतर गया हो या
कुमार सानू - सोनू निगम के गानों में लड़की का चेहरा अगर याद आया हो तो जनाब सच्चे आशिक रह चुके हैं !

प्यार किया और हर फिक्र को धुएं में न उड़ाया तो क्या खाक प्यार किया !
दिल टूटने पर जाम न छलकाए तो मुहब्बत का मुरब्बा लगा लो !
इश्कबाजी की और पंगे न हुए तो घास उखाड़ने लायक भी नही बचे हो तुम !
प्यार किया और शायर न बना तो अनपढ़ बने रहने लायक हो तुम !

Image result for loveइश्क कल भी था, आज भी है और आगे भी रहेगा !
लाख कॉन्फिडेंस हो आज के लौंडों में की वो उसे बेबी सोना करके गले लगा रहा, मगर जज्बात और मर्यादा में रहकर प्रेम की परिभाषा गढ़ देने वाले सच्चे आशिक अब नही मिलते !
ऑनलाइन की दुनिया में आप दर्जनों गर्लफ्रेंड्स बना सकते हो लेकिन एक लड़की की सपनों के सहारे जवानी गुज़ार देने वाले प्रेमी कभी नही बन सकते आप !