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24 June 2017

सामने से 56 इंच दिखाओ!

कश्मीर, गरीबी और नेता से देश का माहौल हमेशा रंगीन रहता है| मार-काट, भुखमरी और बेरोजगारी पेशेवर नेताओं और नेताइनियों का ग्लूकोज है| अरबपति दलित कहे जा रहे हैं और दलित अरबपतियों के लिए बलि चढ़े जा रहा हैं| मुल्ले पाकिस्तान की जीत पर पटाखे फोड़े जा रहे हैं और नेता उसका सबकुछ चाट रहा है|

सरकार राष्ट्रवादियों की है मगर राष्ट्रवादियों को ये समझ नहीं आ रहा की साला सरकार चला कौन रहा है? भयंकर धांसू हिंदुत्व का चोला पहनने वाली बीजेपी भगवा से घबरा क्यूँ रही है? राम मंदिर और धारा 370 के मसले पर हरियाली के प्रति बीजेपी और मोदी का सद्भाव सबका साथ- सबका विकास के कारण है या इस्लामी-सेकुलरों के डर से! देश में हिंदुत्व के शासन का प्रतिनिधि मौनमोहन का रिकॉर्ड तोड़ने वाले हैं! समूची पार्टी को सिर्फ चुनाव दिखने लगा लगा है, हाँ बीच में फुर्सत मिलने पर घूम-टहल भी आते हैं फॉरेन से!

बीजेपी ने युवाओं का सपना तोडा है| बेरोजगार बनाकर घर बैठा दिया, मोबाइल थमाकर जिओ दिला दिया! बेटा करते रहो फेसबुक, व्हाट्सएप्प! लड़ते रहो संघी-कांग्रेसी बनकर! रोजगार से ज्यादा जरूरी युवाओं के लिए हीरो-हेरोइन और बाहुबली का सस्पेंस दिखता है!
सत्ता पक्ष का इतना पिलपिला रूप कभी नहीं देखने को मिला जब विपक्ष में राहुल गाँधी और लालू के लाल जैसे नेता प्रायोजित किये जाते हों| फिर भी इनसे न तो वामपंथी संभल रहे न ही नक्सली| जिसे जो मन आता है वो भरपेट सरकार और मोदी को गरिया दे रहा है| क्या फायदा इतने प्रचंड पहुमत का जब आपसे एक कन्हैया एक उमर खालिद तक कंट्रोल नहीं होता? कांग्रेसी मध्य प्रदेश में दंगा करते हैं और आप ही के नेता अनशन पर बैठ जाते हैं! कश्मीर में मुल्ले सेना को घसीट-घसीट मार रहे और आप महबूबा के आशिकी के फंसे हो! पाक रोज अन्दर आकर देश के सीने में खंजर घोंप रहा और आप नवाजियत में उलझकर अमेरिका का मुंह ताकते हो! चीन तो आपके बस का है ही नहीं, छेड़ोगे तो अरुणाचल भी दे दोगे! बची खुच मर्यादा अमेरिका की चमचागिरी में ही ढीली कर ही लीजिये!

एक थी सोनिया, जो रात में भी लाठी चलवाकर कितनों को सलवार-कमीज पहना देती थी| कभी फिल होता है की ये बीजेपी की सरकार न होकर बिजली का खम्भा है, जिसपर हर विरोधी कुत्ते टांग उठाकर हल्का हो लेता है! अब आपके भक्तगण भी लाइन में लगने वाले हैं!

माफ़ कीजिये हमने आपको बहुमत इसलिए नहीं दिया था की विकास का मतलब रोज नए-नए टैक्स थोपकर इकॉनमी बेहतर करें! बेहतर होगा की जनता की जेब लुटने के बजाए अपने खर्चे पर लगाम लगाइए! नेताओं की सुविधा, वेतन-भत्ते में कटौती कीजिये| देशद्रोहियों की सुरक्षा हटाइए| ये आपके लिए मुश्किल हो सकता है क्योंकि आपने शायद लोकतंत्र की सारी मान-मर्यादा का ठेका ले रखा है|

डरते क्यों हो, सख्त बनो! जो भी जरा भी चोंच खोले या जिसको भी आजादी चाहिए सारे रासुका, पोटा, टाडा कानून थोप मारो| सीबीआई, ईडी को शेर की तरह  चोरों के जंगल में छोड़ दो| असली राष्ट्रवादी चेहरा दिखाओ| कश्मीर पर खुल के बोलो, विरोध करे या आतंकवादियों का समर्थन करे सीधी गोली मारो| अमेरिका ब्रिटेन कोई विरोध करे तो बहिष्कार करो उसका| पाक में बलूचिस्तान और गिलगिट क्षेत्रों में सीधी हस्तक्षेप करो! चीन-पाक कॉरिडोर में अड़ंगे लगवाओ! 
Image result for kashmir girl stone pelting imageसेना को राजनीति से दूर रखो, खुली छुट दो! इजराइल जा रहे हो, वहां से मोसाद को कश्मीर लाओ, सेना को ट्रेनिंग दिलवाओ और पाक के खिलाफ छद्म युद्ध छेड़ो! पत्थरबाजों पर सिर्फ पैलेट गन चलाओ, गैस-वैस से काम नहीं चलेगा! ज्यादा उलझे तो गोली चलाओ बाकी से मोसाद निपट लेगा! कोर्ट चूं-चां करे उसका भी इंतजाम करो!
भारतीय बाजार का इस्तेमाल करो और दुनिया में कारोबार के बदौलत सामरिक ताकत बढाओ! अधिकार-कानून की जो भी बात करे उसे बाजार से बैन करो और खौफ पैदा करो! सऊदी अरब और जापान-कोरिया जैसे देशों से नजदीकियां बढाओ! ईरान और सऊदी के बीच शिया-सुन्नी की लड़ाई का भरपूर फायदा उठाओ!

नेतागिरी और गांधीगिरी का कम से कम इस्तेमाल करो! विपक्ष और मीडिया को रिस्पांस देना बंद करो! जब जनता साथ है तो सारी ऊर्जा झाड़ू लगाने में बर्बाद मत करो! विकास बाद में हो लेगा!
रोल में आओ, सामने से 56 इंच दिखाओ! देखो कोई नहीं टिकेगा सब घाघरा उठाकर भागते मिलेंगे! फिर भी उसके चूतड पर बजाओ ताकि तथाकथित राष्ट्रवाद और असली राष्ट्रवाद में अंतर पता चलते रहे................


लेखक:- अश्वनी कुमार, जो ब्लॉग परकहने का मन करता है’ (ashwani4u.blogspot.com) के लेखक हैं... ब्लॉग पर आते रहिएगा...
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13 July 2016

इस्लाम का जेहादी चरित्र और भारत

इस्लाम के नाम पर मानवता के विरुद्ध रची जा रही साजिश का प्रभाव दुनिया को दिखने लगा है| आईएसआईएस, अलकायदा जैसी संगठनों की मानसिकता इस्लाम व उनकी रक्तपात भरी जेहादी जुनूनों के अफीम में मदहोश है| समूचे विश्व में खलीफाई राज लागू करने की महत्वकांक्षा और इस्लाम के नाम पर खौफ मचाने की प्रवृति असभ्यता के पनपने का संकेत है| दुनिया के ऊपर अपने विचारों, आस्था या उसके तौर-तरीकों को थोपने की सनक विकृत मानसिकता का परिणाम है| पेरिस, बेल्जियम, अमेरिका के बाद बांग्लादेश के ढाका शहर में जिस तरह से इस्लाम के बन्दों ने आईएसआईएस का खौफ दिखाया, गैर-मुसलमानों को चुन-चुन कर मारा, इससे क्या साबित हुआ? की इस्लाम की जेहादी व जुनूनी विचारधारा कुरान के कलमों से चलती है, आयतों के कहे अनुसार चलती है, शरियत के उलुलजुलुल नियमों में उलझी है या फिर इस्लाम के माननेवालों की मनोदशा कुरानशरीफ में लिखी बातों पर आधारित है इसलिए उन्हें दुनियादारी, मानवता या सौहार्द नहीं सीखना|

सवाल है, क्या दुनिया में बढ़ रही आतंकवादी घटनाओं को नियंत्रित करने का कोई कारगर उपाय नहीं? क्या दुनिया के ताकतवर देशों की ड्रोन, मिसाइल या बमों के आगे एक धर्म की विचारधारा भारी पड़ रही है? इसलिए की क्यूंकि सीरिया और ईराक में आईएसआईएस के बढ़ते प्रभाव को तमाम कोशिशों के बावजूद भी अमेरिका और पश्चिमी देश उसे नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं| ईराक व सीरिया के ताज़ा हालात असभ्यता और बर्बरता का प्रतीक नहीं है? दुनिया आतंकवाद के तांडव के आगे असहाय है| उनकी बेचारगी, उनकी सहनशीलता इस्लाम के पैरों तले है|
                                                                                                              
भारत में आईएसआईएस के पनपने की सम्भावना से कटाई इनकार नहीं किया जा सकता| इसलिए की भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है और जहाँ की सेक्युलर विचारधारा की मनोवृति ऐसी रही है जैसे वो तो धर्म विशेष के नाम पर उनके स्वागत के पलक पावडे बिछा देंगे| भारत में बढ़ रही इस्लामिक व जेहादी गतिविधियां बेहद खतरनाक ढंग से कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा दे रही है| जहाँ धर्म की आड़ में विभिन्न मदरसों, मस्जिदों में मौलवी जेहाद और आतंक की खुलेआम शिक्षा देते हैं, जेहादी बनने का प्रशिक्षण देते हैं| फिर भी कोई भारतवंशी सेक्युलर ये मानने को तैयार नहीं की आतंक का कोई धर्म होता है| जबकि आंकड़ें बताते हैं की देश में अबतक हुए विभिन्न इस्लामिक आतंकवादी हमलों में 50,000 से अधिक लोग मारे गए हैं|

हमारे यहाँ कोई डोनाल्ड ट्रंप या शेख हसीना जैसे मुसलमानों को इसका जिम्मेदार मानने को कतई तैयार नहीं है| लोग खौफ में जी रहे हैं, हमले हो रहे हैं, मासूम मारे जा रहे हैं, लोगों का घर बर्बाद हो रहा है, घाटी सुलग रही है, जवान शहीद हो रहे हैं, फिर भी आतंक का कोई धर्म नहीं है| कुरानशरीफ की आयतें सेक्युलर भारत के लिए सर आँखों पर है चाहे वो जिहाद या बर्बरता ही क्यूँ न सिखाता हो| किसी में भी हिम्मत नहीं जो इस्लाम के इन जड़ों को प्रतिबंधित करे|

Image result for islam terror imageजाकिर नाईक का मसला इतनों दिनों तक छुपा कैसे रहा? भारत की जमीन से दुनिया को जिहाद करने, आतंकी बनने का सन्देश दिया जाता रहा फिर भी हम इतने संवेदनहीन क्यों बने रहे? क्या ये हमारी सुरक्षा तंत्र की विफलता नहीं है? राजनीति और अपने लोकतंत्र की आड़ में धर्मनिरपेक्ष बने रहने की झूठी शान हमारे राष्ट्र-राज्य को बर्बाद कर देगी| अभी तो मजा आ रहा है की आम लोग ही तो मर रहे हैं, जब खास मरने लगेंगे तब शायद उन्हें हकीकत का अंदाज़ा हो पर तबतक देर हो चुकी होगी|

ईराक और सीरिया का रास्ता भारत भी पहुँचता है और भारत का खौफनाक इस्लामिक इतिहास और उसका चरित्र उनके स्वागत के लिए हरसंभव तत्पर रहेगा| फिर तो सारे बम-बारूद धरे के धरे रहे जायेंगें और लोगों को कलमें, आयतें पढने को मजबूर हो जाना पड़ेगा... क्या नहीं!

लेखक:- अश्वनी कुमार, जो ब्लॉग पर ‘कहने का मन करता है’ (ashwani4u.blogspot.com) के लेखक हैं... ब्लॉग पर आते रहिएगा...