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02 August 2017

कश्मीर को चाहिए आजादी

किसको किसको आजादी चाहिए, लाइन में लग जा! कश्मीर ले चलो अभियान छेड़ो! सेना स्वागत की तैयारी में बैठी है! 
बंगाल से कश्मीर भाया दिल्ली जेएनयू आजादी स्पेशल ट्रेन की गारंटी हम लोग ले लेंगे! टिकट के पैसे भी दे देंगे है! हिम्मत तो निकलो शिकारी वहां घात लगाए बैठा है!
खूब डफली बजा कर नारे लगईओ!
पिछवाड़े पर सेना की धुन बजेगी तो सारी आजादी की औकात घुस जाएगी!
बेटा यह वही मोदी है जो 3 साल पहले भी था मगर उसे बदला तुमलोगों ने! सेना ने रक्त पात का आगाज कर दिया है।

दिनदहाड़े और डंके की चोट पर सेना ने एनकाउंटर मचा रखा है! कब तक छुपोगे, बाज की नजर लग चुकी है मोदी को!
आओ सामने बरसाओ पत्थर! सीधे अल्लाह के पास रवाना हो जाओगे! चेतावनी नहीं गोली चल रही है!
चड्डी-वड्डी लेकर आना, सुना है कि जन्नत में भारी मांग है! 

बेटा मोदी बिना बोले इतना कर रहा है तो सोचो कि अगर बोलकर करे 100 करोड़ लोगों का सपोर्ट पाकर सेना बिना सोचे समझे रवाना करने लगेगी!

अभी मोदी ने धारा 35ए में धीरे से उंगली डाली है तो तुम्हारी महबूबा इतना उछल रही है!
सोचो कि अगर 370 में बंदूक की नली घुसाएगा तो क्या करोगे? अभी वक्त है अच्छे से प्लान बना लो नहीं तो सोचने का भी समय मोदी नहीं देने वाला!

धारा 370 पर एक्शन हुआ तो कश्मीर में सबसे पहले अंबानी कूदेगा और कश्मीरियत और इस्लामियत की धज्जियां उड़ा कर रख देगा! होटल रेस्टोरेंट और हॉलीडे पैलेस के लिए घाटी की शान होगी! कट्टरपंथ का हलाला हो जाएगा बिजनेसमैनों के हाथों!

पाकिस्तान की नाजायज औलाद बनने की जल्दी में घाटी से ही आजाद हो जाओगे! पाकिस्तान एक घास भी उखाड़ नहीं पाएगा कश्मीर में सेना के रहते! गलती की तो इंडियन बम ही गिरेगा ऊपर से और नाम पाक का होगा! इंडियन दिमाग है बेटा, खुराफाती तो होगी ही!

ज्यादा उछल कूद मत मचाओ! आतंकवादियों का एनकाउंटर हो रहा है, चुपचाप उसका समर्थन करो!
पत्थरबाजी की चुतियापा की तो मोदिया दिल्ली से बैठ कर सब देख रहा है! इशारा हुआ नहीं कि पिछवाड़े में बम घुसाकर उड़ाने लगे जाओगे!

Image result for army beating stone peltor imageबदलाव देखो बेटा, की पहले आतंकियों को पकड़ा जाता था अब गोली मारने के साथ साथ मोहल्ले को भी उड़ा दिया जा रहा है! मोदी इजराइल घूमने नहीं गया था पूरा इंतजाम करके आया है!
सेना का स्टाइल बिल्कुल मोसाद वाला लग रहा है!

जनता बदली तो मोदी आया! मोदी बदला तो सेना का स्वाभिमान बदला! और अगर सेना बदली तो कश्मीर बदलेगा, कश्मीर का झंडा बदलेगा और शान से हमारा तिरंगा लाल चौक पर फहराकर सेना की सलामी लेते हुए वंदे मातरम की धुन पर हवा में इतराते हुए पाकिस्तान की मां की आंख कर देगा...
जय_हिंद

✍ अश्वनी ©



21 January 2017

ट्रंप युग का आगमन

दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति की सत्ता अब औपचारिक तौर पर डोनाल्ड ट्रंप के हाथों में आ गयी है| अमेरिकी राजनीति के शिखर पर एक ऐसा व्यक्ति काबिज हुआ है जो न तो देश के प्रबुद्ध मीडिया वर्ग को स्वीकार्य है और न ही बड़ी पढ़ी-लिखी और गंभीर आबादी को| डोनाल्ड ट्रंप की अस्पष्ट नीतियाँ, इस्लाम को अमेरिका से बाहर करने की प्रतिबद्धता और गैरजरूरी आर्थिक-राजनीतिक बयानबाजी उन्हें सत्ता तक पहुंचा गयी| ये हकीकत कई मायनों में भारत के 2014 चुनावों के वक्त मोदी लहर की पुरान्वृति कही जा सकती है|

डोनाल्ड ट्रंप के चुनावी अभियानों में इस्लामी आतंकवाद और कट्टरपंथी विचारधारा को नेस्तनाबूत करने की उनकी सोच वर्तमान वैश्विक माहौल से प्रेरित है| अमेरिका सहित तमाम पश्चिमी देश आईएसआइएस व अन्य इस्लामिक आतंकवादी संगठनों के मचाये उत्पात से सहमा था| ऐसे वक्त में अमेरिका जैसी महाशक्ति के राजनीतिक-आर्थिक हालातों को नज़रअंदाज कर खुलेआम इस्लामी आतंकवाद को चुनौती देना ट्रंप को प्रचलित बना गया| मतलब, अमेरिकी जनता के लिए अब आर्थिक चुनौतियों से बढ़कर आतंकवाद का डर ज्यादा महत्वपूर्ण बन गया है| ट्रंप जैसी शख्सियत का उदय 21वीं सदी को या तो सबसे बड़ा वैश्विक सुधार के लिए जाना जाएगा या फिर वैश्विक उथल-पुथल का जिम्मेदार| वक्त और हालात जैसे भी हों पर ट्रंप प्रशासन का ज्यादातर ध्यान अमेरिकियों के लिए ही होगा| अगर ऐसा हुआ तो दुनिया भर के देशों से अमेरिका का प्रभाव निश्चित तौर पर घटेगा और चीन जैसे देशों की मनमानी से सामरिक टकराव जैसी स्थितियों से इंकार भी नहीं किया जा सकता|

दूसरी तरफ सीरिया, लीबिया, मिस्र या अफगानिस्तान जैसे देशों के आतंकवाद पर अमेरिका को बेहद सावधानी से काम करना होगा| क्योंकि इन देशों में पनपे आइएसआइएस और तालिबान जैसे संगठन अमेरिका, रूस सहित पश्चिमी देशों के अथक प्रयास के बाद भी कुछ भी बिगाड़ा न जा सका है| अब देखना होगा की ट्रंप इन संगठनों के आस्तित्व पर कितना भारी पड़ पाते हैं| या उनकी कार्यकुशलता सिर्फ अमेरिका को आतंकवाद से मुक्त रखने को है ये वक्त बतायेगा|

भारत के प्रति ट्रंप की नीति में उदारवाद की झलक थोड़ी बहुत तो मिली है| अमेरिकी-हिन्दुओं के संबोधन में ‘आई लव हिन्दू’, ‘आई लव इंडिया’ जैसे शब्द और मोदी की नीतियों का समर्थन, शायद उनके कार्यकाल में भारत-अमेरिका संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाए| भारत को अपने आर्थिक हितों के साथ-साथ ट्रंप की चीन विरोधी नीतियों से चीन को भी साधना होगा और आतंकवाद पर उनके रुख से पाकिस्तान को भी| अब देखना ये होगा की नरेन्द्र मोदी भारत के हितों के लिए ट्रंप का कितना समर्थन हासिल कर पाते हैं|

डोनाल्ड ट्रंप ने ‘मेड इन इंडिया’ की तरह ‘मेड इन अमेरिका’ का नारा दिया| जो खुले तौर पर अमेरिकियों के लिए चीनी सामानों पर निर्भरता कर करने के स्पष्ट संकेत हैं| दक्षिण चीन सागर पर चीन की दादागिरी से अमेरिका टकराव के मुड में दिख भी रहा है| जापान, फिलीपिंस, ताइवान व दक्षिण कोरिया भी इस मुद्दे पर चीन से परेशान रहा है| ऐसे में भारत को चाहिए की किसी तरह इन सारे देशों को एक साथ जोड़कर अमेरिका के साथ चीनी आयात को कम करने के लिए आपसी सहयोग की संधि बनाए| ऐसी स्थिति में चीन की अर्थव्यवस्था बुरी तरह लड़खड़ा जायेगी| जिस कारण दुनिया की आर्थव्यवस्था से चीन की गैरजिम्मेदाराना नीतियाँ अपेक्षाकृत प्रभावहीन हो सकती है|

Image result for donald trump against islam imageइस तरह अमेरिका के नए राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप का आगमन उम्मीदों का मेघ लेकर आया है| इन बादलों में किसी को कुछ दिख नहीं रहा है| कितना पानी बरसेगा या सिर्फ मोर नाचने के बादल हैं ये भी वक्त बतायेगा| हवा चलेगी, मेघ उड़ेंगे तो शायद कुछ अंदाजा लग पायें| फिर भी ट्रंप से रूस को भी उम्मीद है, भारत को भी उम्मीद है और वैश्विक शांति बहाली की भी|
हो सकता है ‘दारुल-ए-इस्लाम’ इस्लाम का राज कायम करने की मंशा बदल जाए| नहीं बदली तो वो समझ जाएँ की ये सहिष्णुता की बात करने वाले ट्रंप नहीं बल्कि इस्लाम विरोध के झंडाबरदार डोनाल्ड ट्रंप हैं..... मान जाओ.... नहीं तो आस्तित्व के लिए संघर्ष करोगे...

लेखक:- अश्वनी कुमार, जो ब्लॉग पर ‘कहने का मन करता है’ (ashwani4u.blogspot.com) के लेखक हैं... ब्लॉग पर आते रहिएगा...



03 November 2016

नेताओं की गद्दारी पुरानी आदत

भारत में लोकतंत्र के बुनियाद और उसके कर्ता-धर्ता, पोषक नेताओं के हवाले रखा गया| नाममात्र के जनतांत्रिक अधिकारों की झांकी से नेताओं के कारनामों और हरामखोरी के इतिहास पर पर्दा नहीं डाला जा सकता| नेताओं का चिंतन और दूरदर्शिता के पैमाने पर देश के साथ वक्त-वक्त पर की गई कायरता, गद्दारी उन्हें बुद्धिजीवी भी बनाती है और न्यूज़ से पोपुलर भी| चुनाव जीतने के लिए या फिर मुस्लिम वोट पाने के लिए इन नेताओं की टोलियाँ धीरे-धीरे देश की जडें खुरेदते चली जा रही है| राजनेताओं के संदर्भ में ऐसी कठोर शब्दों का इस्तेमाल करना मजबूरी बनती जा रही है| भारतीय राजनीति में दिग्विजय, लालू और केजरीवाल जैसे नेताओं की उपस्थिति, लोकतंत्र और नेतातंत्र दोनों के लिए धब्बा है|
                                                                                  
सरकार और प्रशासन दोनों के फैसलों में कमियां ढूंढ़कर हल निकालना बेशक विपक्ष का काम और जिम्मेदारी दोनों हैं, लेकिन राष्ट्रहित के मसलों पर वोट के लिए या मुसलमानों को खुश करने के लिए आतंकवादियों का समर्थन, देशहित का गला घोटने जैसा है| भोपाल एनकाउंटर में सही या गलत की चर्चा से या फिर उन आतंकवादियों की तरफदारी से न केवन देश के गद्दारों का मनोबल बढेगा बल्कि इन नेताओं की बयानबाजी से आतंक को पनपने का बेहतर माहौल भी मिलेगा| देश की तमाम राजनीतिक पार्टियाँ आतंक की विरूद्ध की गई कारवाई में बड़ी बाधक बनती है| कश्मीर से लेकर देश के अन्य आतंकग्रस्त क्षेत्रों में सैनिक कारवाई को धर्म से प्रेरित बताना, देश के सैनिकों का मनोबल तोड़ कर रख देता है| सुरक्षा बलों पर सवाल उठाने वाले कभी एक बार अपने आस-पास खड़े सुरक्षा कर्मियों को हटा कर देख लें की डर और आतंक क्या होता है?

सम्प्रदायवाद या धार्मिक आधार पर आतंक या गुनाह को बांटना देश तोड़ने जैसा है| कश्मीर में आज अलगाववाद की स्थिति इसलिए है की क्षेत्रीय तौर पर आतंकवादियों और पत्थरबाजों को उनका समर्थन हासिल है| देश के अन्य शहरों में बढती कट्टरपंथी उत्पात धीरे-धीरे दंगे का शक्ल ले रही है| हिन्दुओं के हर त्यौहार में बाधाएं डालकर दंगे करवाले की सोची-समझी साजिश रची जा रही है| नहीं तो क्यूँ गैर-बीजेपी शासित राज्यों में दंगों के आंकडें बेहद भयावह हैं?

Image result for bhopal encounter imageImage result for gaddar neta imageआतंकवादियों या देश के सुरक्षा के लिए खतरा बनते लोगों को ठोकना, देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों के लिए खौफ पैदा करता है| सफेदपोशों के संरक्षण में पल रहे देश के गद्दारों को मार गिरना अब भी सेना के लिए पाक से बड़ी चुनौती है| फिर भी सेना के मनोबल के जरिये उनके साहस, पराक्रम या वीरता को जीवंत रखने की कोशिश करने के लिए प्रधानमंत्री जी को आभार... कश्मीर में खुलेआम ठोकने की छुट देने के लिए आभार... और भोपाल एनकाउंटर अगर फर्जी है तो शिवराज सरकार पर फक्र... #Shoot_on_the_spot


लेखक:- अश्वनी कुमार, जो ब्लॉग पर ‘कहने का मन करता है’ (ashwani4u.blogspot.com) के लेखक हैं... ब्लॉग पर आते रहिएगा...

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13 July 2016

इस्लाम का जेहादी चरित्र और भारत

इस्लाम के नाम पर मानवता के विरुद्ध रची जा रही साजिश का प्रभाव दुनिया को दिखने लगा है| आईएसआईएस, अलकायदा जैसी संगठनों की मानसिकता इस्लाम व उनकी रक्तपात भरी जेहादी जुनूनों के अफीम में मदहोश है| समूचे विश्व में खलीफाई राज लागू करने की महत्वकांक्षा और इस्लाम के नाम पर खौफ मचाने की प्रवृति असभ्यता के पनपने का संकेत है| दुनिया के ऊपर अपने विचारों, आस्था या उसके तौर-तरीकों को थोपने की सनक विकृत मानसिकता का परिणाम है| पेरिस, बेल्जियम, अमेरिका के बाद बांग्लादेश के ढाका शहर में जिस तरह से इस्लाम के बन्दों ने आईएसआईएस का खौफ दिखाया, गैर-मुसलमानों को चुन-चुन कर मारा, इससे क्या साबित हुआ? की इस्लाम की जेहादी व जुनूनी विचारधारा कुरान के कलमों से चलती है, आयतों के कहे अनुसार चलती है, शरियत के उलुलजुलुल नियमों में उलझी है या फिर इस्लाम के माननेवालों की मनोदशा कुरानशरीफ में लिखी बातों पर आधारित है इसलिए उन्हें दुनियादारी, मानवता या सौहार्द नहीं सीखना|

सवाल है, क्या दुनिया में बढ़ रही आतंकवादी घटनाओं को नियंत्रित करने का कोई कारगर उपाय नहीं? क्या दुनिया के ताकतवर देशों की ड्रोन, मिसाइल या बमों के आगे एक धर्म की विचारधारा भारी पड़ रही है? इसलिए की क्यूंकि सीरिया और ईराक में आईएसआईएस के बढ़ते प्रभाव को तमाम कोशिशों के बावजूद भी अमेरिका और पश्चिमी देश उसे नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं| ईराक व सीरिया के ताज़ा हालात असभ्यता और बर्बरता का प्रतीक नहीं है? दुनिया आतंकवाद के तांडव के आगे असहाय है| उनकी बेचारगी, उनकी सहनशीलता इस्लाम के पैरों तले है|
                                                                                                              
भारत में आईएसआईएस के पनपने की सम्भावना से कटाई इनकार नहीं किया जा सकता| इसलिए की भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है और जहाँ की सेक्युलर विचारधारा की मनोवृति ऐसी रही है जैसे वो तो धर्म विशेष के नाम पर उनके स्वागत के पलक पावडे बिछा देंगे| भारत में बढ़ रही इस्लामिक व जेहादी गतिविधियां बेहद खतरनाक ढंग से कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा दे रही है| जहाँ धर्म की आड़ में विभिन्न मदरसों, मस्जिदों में मौलवी जेहाद और आतंक की खुलेआम शिक्षा देते हैं, जेहादी बनने का प्रशिक्षण देते हैं| फिर भी कोई भारतवंशी सेक्युलर ये मानने को तैयार नहीं की आतंक का कोई धर्म होता है| जबकि आंकड़ें बताते हैं की देश में अबतक हुए विभिन्न इस्लामिक आतंकवादी हमलों में 50,000 से अधिक लोग मारे गए हैं|

हमारे यहाँ कोई डोनाल्ड ट्रंप या शेख हसीना जैसे मुसलमानों को इसका जिम्मेदार मानने को कतई तैयार नहीं है| लोग खौफ में जी रहे हैं, हमले हो रहे हैं, मासूम मारे जा रहे हैं, लोगों का घर बर्बाद हो रहा है, घाटी सुलग रही है, जवान शहीद हो रहे हैं, फिर भी आतंक का कोई धर्म नहीं है| कुरानशरीफ की आयतें सेक्युलर भारत के लिए सर आँखों पर है चाहे वो जिहाद या बर्बरता ही क्यूँ न सिखाता हो| किसी में भी हिम्मत नहीं जो इस्लाम के इन जड़ों को प्रतिबंधित करे|

Image result for islam terror imageजाकिर नाईक का मसला इतनों दिनों तक छुपा कैसे रहा? भारत की जमीन से दुनिया को जिहाद करने, आतंकी बनने का सन्देश दिया जाता रहा फिर भी हम इतने संवेदनहीन क्यों बने रहे? क्या ये हमारी सुरक्षा तंत्र की विफलता नहीं है? राजनीति और अपने लोकतंत्र की आड़ में धर्मनिरपेक्ष बने रहने की झूठी शान हमारे राष्ट्र-राज्य को बर्बाद कर देगी| अभी तो मजा आ रहा है की आम लोग ही तो मर रहे हैं, जब खास मरने लगेंगे तब शायद उन्हें हकीकत का अंदाज़ा हो पर तबतक देर हो चुकी होगी|

ईराक और सीरिया का रास्ता भारत भी पहुँचता है और भारत का खौफनाक इस्लामिक इतिहास और उसका चरित्र उनके स्वागत के लिए हरसंभव तत्पर रहेगा| फिर तो सारे बम-बारूद धरे के धरे रहे जायेंगें और लोगों को कलमें, आयतें पढने को मजबूर हो जाना पड़ेगा... क्या नहीं!

लेखक:- अश्वनी कुमार, जो ब्लॉग पर ‘कहने का मन करता है’ (ashwani4u.blogspot.com) के लेखक हैं... ब्लॉग पर आते रहिएगा...