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22 August 2017

तीन तलाक: धर्म से मिली आजादी

देश के सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित करते हुए इसे रद्द कर दिया। देश की न्यायपालिका और लोकतंत्र के लिए ऐतिहासिक दिन है। महिला सम्मान की आजादी को धर्म से बांधकर रखने वाले मौलानाओं और मौलवियों कि मनमानी का अंत हुआ। फैसले में देरी हुई पर फैसला दुरुस्त आया। भारतीय संविधान और न्याय तंत्र का एक बेहतर, उत्कृष्ट नमूना आम लोगों के सामने आया जिसकी अपेक्षा हमेशा जनता को रही है।

मगर धार्मिक के आजादी के मायने बदले हैं।
हवा बदल रही है। भीड़तंत्र और कट्टरता पर समाज हावी हो रहा है।
सरकार राष्ट्रवादी है, बिना बोले बिना कुछ कहे सब कुछ करवा रही है तो सोचो अगर कह के लेगी तो कितना दर्द देगी!
धर्म का मसला संवेदनशील होता है इसलिए चुप्पी घातक होती हैं। मोदी को मुस्लिम परस्त कहने वाले देख ले,
समय-समय पर हमेशा खतरे में आ जाने वाले इस्लाम को उसने इस बार खाई में लटका दिया है!

कुरान, शरीयत की इज्जत ना तो अदालत कर रही है और ना ही सरकार!
बचाओ राहुल बाबा! बचाओ सिब्बल, दिग्गविजय चचा!
राहुल को मत लईयो बोलने इस्लाम के ऊपर नही तो चिथड़े उड़ा देगा बिना मतलब के!
बाप रे इतना बड़ा दुस्साहस शांतिदूतों के सामने भयंकर परिणाम भुगतने होंगे सरकार को!
लेकिन मोदी का घंटा नहीं उखाड़ पाओगे! मोदी अलग चीज है, कानों कान खबर नहीं होने देता!
भरोसा न हो तो गुजरात का हकीकत देख लो!
सब सेटिंग सरकार की है लेकिन नाम कोर्ट का होगा! 100 करोड़ का साथ हो तो कोई बंदा एवेरेस्ट चढ़ जाए सेंटीमेंट के लिए! समझ लो!
सही भी है इस मुद्दे पर राजनीति का चुतियापा कम से कम होगा! 6 महीने मिले हैं सरकार को कानून बनाने के लिए. लोहा गरम है, अदालत का साथ भी है लगे हाथ यूनिफॉर्म सिविल कोड थोप ही डालो!

कुरान का हवाला देकर हलाला करता है और बड़े फख्र से दाढ़ी पर हाथ फेरकर अल्लाह वाला बनता है!
इतने शरीफ हो तो तीन बीवियां क्यों रखते हो? 40 बच्चे क्यों पैदा करते हो?
सालों ने महिलाओं की जिंदगी नरक बना रखी है!
कुरान शरीफ से तुम चल सकते हो तुम्हारा धर्म चल सकता है लेकिन देश और लोग नहीं चल सकते!
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वीं सदी में जाहिल और गंवारों वाली बुद्धि कहां से लाते हो बे!
फिलहाल अदालत ने इस्लामियत की जाहिलपने में पहले कील ठोकी है! कोर्ट ने ट्रेलर जारी किया है, अब देखते जाओ मोदी और संघ का पूरा फ़िल्म बाकी है!
जो सीना ठोक कर कहता था, इस्लाम के डर से मोदी भी सेकुलर हो गया, बाहर आओ देखो तुम्हारे इस्लाम को मोदी ने उल्टा लटका दिया है!

बंदरों के हाथ में कोर्ट ने नारियल थमा दी है! जिसका फूटना निश्चित है! वो कारीगरी करेगा अपने हिसाब से!
मतलब कानून बीजेपी बनाएगा तो सोचो कि मुस्लिम महिलाओं के हाथों को तलवार से लैस कर देगा! बीवी मार-मार के सारी शरीयत पिछवाड़े में घुसेड़ देगी!
मौलानाओं के अय्याशी की दुकान बंद हो गई!

Image result for muslim woman triple talaq hd imageसंघ का पहला सपना पूरा हो गया!
बीजेपी 2024 तक अपराजय है!
मोदी एक शाश्वत सच है जिसे हर हाल में झेलना ही होगा! सारी गुलामी और धार्मिक अहंकारों को झाड़ने का श्रेय मोदी ही लेगा लिख के रख लो!
राम मंदिर पर जो उड़ रहे हैं या इस्लाम का दम्भ भर रहे हैं वो समझ ले कि अगर आज निर्णय हो जाये तो कोई माई का लाल पैदा नही हुआ जो रोक दे!
और निर्णय होगा... यही मोदी इसी कोर्ट का सहारा लेकर हिन्दुओं को उसका अधिकार दिलाएगा!
एक दम 100% गारंटी के साथ! आ रहे हैं जस्टिस दीपक मिश्रा मुख्य न्यायधीश बनकर!

जस्टिस खेहर तीन तलाक के पक्ष में थे, मतलब अभी भी डर है उनके अंदर या न्याय प्रधान होने का घमंड! ज्यादा टिप्पणी नहीं करूंगा किसी अति-विद्वान के ऊपर जो अत्याचारों को धर्म का नाम देता हो!
साधुवाद उन न्यायधीशों का जिन्होंने धार्मिक अत्याचारों की शक्ल में देश में पनप रही कट्टरवादी विचारधारा का अंत किया। उस सरकार की सोच और जज्बे को सलाम जिसने महिलाओं हक के लिए क्लियर स्टैंड लिया।
और उस विपक्ष की आवाज को भी नमन जिसके चतुर वकीलों की दलिलों से तीन तलाक दफन हुआ!
 
ऐसे ही हंसते रहिये, मुस्कुराते रहिये और देखते रहिये

 अश्वनी ©


15 August 2017

आजादी@70 श्रेष्ठ भारत

आज वक्त है दिखावे का! उठाओ झंडा, फहरा दो तिरंगा! दिखा दो दुनिया को अपनी ताकत! लेकिन देश से गरीबी, भुखमरी ये सब नहीं मिटना चाहिए! पेट पालने का साधन है नेताओं का!

हवस की निगाहों से न जाने कितने तिरंगे फहराए जायेंगे... ये हवस देश को लील जाने की है...
56 सेकंड तक झंडे को सलामी देने में फट जाती है इन्हें, तो सोंचो की हमलोगों ने 70 सालों से इन काले अंग्रेजों को सलामी देने में कितना वक्त और एनर्जी बर्बाद किया!

राष्ट्रगान गा लो, देशभक्ति का जूनून पैदा कर लो! सिर्फ एक दिन, फिर साल भर गरियाते रहना! देश की आजादी फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन से है! देश की आजादी, किस ऑफ़ लव से है! देश की आजादी इन्सल्लाह टुकड़े होंगे से है! देश की आजादी अवार्ड वापसी से है!

आजादी का 70 साल का सफ़र हमें यही सब सिखाता है! की अपनी मां, अपनी धरती, अपनी सेना को गरियाओ... अपनी इज्जत, मान-मर्यादा पाकिस्तान और चीन को बेच आओ! राष्ट्रवाद से घृणा करो! देशभक्ति को गाली मानो!

तो सुनो...

ये धरती है वीरों की जहाँ एक पुष्प की अभिलाषा भी सेना के पैरों तले कुचलने की होती है...

ये धरती है उन शहीदों की जो भरी जवानी में भारत माँ के लिए फांसी के फंदे से हँसते हँसते झूल गये थे...

ये धरती है उस देश की, जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा... ऐसा भारत देश है मेरा...

ये 70 वर्षों का आजाद भारत है... राष्ट्रवाद से सिंचित, देशप्रेम से पोषित और तिरंगे जैसा स्वाभिमानी...

सेना हमारी आन-बान-शान है. सरकार हमारी राष्ट्रवादी है. जनता उदार है, तभी आजादी है...
नहीं तो तिरंगे को हवस से देखने वालों की गर्दन उखाड़ के हाथ में थमा दिया जाता! देश से गद्दारी अब स्वीकार नहीं होगी! कांग्रेस ने गद्दारी आजादी से ही की लेकिन परिणाम अब भुगत रहा है!

देश को बांट दिया, बाप का राज था क्या! अब जरा बोल के भी दिखाओ, जुबान खींच के सीने पर चढ़कर तिरंगा गाड़ देंगे! अपनी मनमर्जी नहीं चलने वाली अब, चाहे सरकार हो या न्यायपालिका! संविधान को देश के दायरे में लाओ! और देश को जनता के उम्मीदों के दायरे में लाओ, तब आजादी सफल होगी!

नेतागिरी का अंत करो! भाषणबाजी और जुमलेबाजी को अमीरों के लिए इस्तेमाल करो, गरीबों के लिए नहीं!
देश को जनभावना से चलना चाहिए, न की काले अंग्रेजों के आदेश से!

आस्तीन के साँपों से देश को बचाओ! हिंदुस्तान का खाकर उसी में थूकने वाले हरामियों को ठिकाने लगाओ! खानदान पाकिस्तान में है और ये लोग हिंदुस्तान की धरती को नापाक बनाने की साजिश में लगे हैं!

आजादी का सारा क्रेडिट इन गद्दारों को दो जो देश को नोचकर खा गए! वंशज उसी के हो तो गद्दारी अभी भी दिख जाती है हमें!

स्वतंत्रता ऐसे नहीं आती... मजबूत इरादों से भी नहीं आती... झंडा और नारे से भी नहीं आती...

त्याग करना पड़ता है आजादी के लिए, जो पिछले 70 सालों से देश की आधी जनता कर रही है! रहने को छत नहीं, खाने को रोटी नहीं और पहनने को कपडे नहीं!
फिर भी अगर देशभक्ति को जूनून देखना है तो जाओ आज किसी गाँव के सरकारी फर्टीचर स्कूलों में! मतलब ज्यादा नहीं पता बच्चों को मगर उनके नारों में भारत माँ की गर्जना सुनो!

“जो भारत से टकराएगा... चूर-चूर हो जाएगा...”

झंडे का सम्मान बच्चों से सीखो, जो एक रूपये के झंडे से आजादी का जश्न मनाकर कई महीनों तक घर के छत पर फहराता रहता है!
ये है आजादी का जश्न जिसके जोश में हमारा हिंदुस्तान है... लाल किले के प्राचीर से मोदी की गर्जना है और एक नए भारत को गढ़ने की कोशिश है जो सुमित्रानंदन पन्त की इन पंक्तियों से लबरेज है की...

“जो भरा नहीं है भावों से
जिसमें बहती रसधार नहीं।
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं...


✍ अश्वनी ©

02 August 2017

कश्मीर को चाहिए आजादी

किसको किसको आजादी चाहिए, लाइन में लग जा! कश्मीर ले चलो अभियान छेड़ो! सेना स्वागत की तैयारी में बैठी है! 
बंगाल से कश्मीर भाया दिल्ली जेएनयू आजादी स्पेशल ट्रेन की गारंटी हम लोग ले लेंगे! टिकट के पैसे भी दे देंगे है! हिम्मत तो निकलो शिकारी वहां घात लगाए बैठा है!
खूब डफली बजा कर नारे लगईओ!
पिछवाड़े पर सेना की धुन बजेगी तो सारी आजादी की औकात घुस जाएगी!
बेटा यह वही मोदी है जो 3 साल पहले भी था मगर उसे बदला तुमलोगों ने! सेना ने रक्त पात का आगाज कर दिया है।

दिनदहाड़े और डंके की चोट पर सेना ने एनकाउंटर मचा रखा है! कब तक छुपोगे, बाज की नजर लग चुकी है मोदी को!
आओ सामने बरसाओ पत्थर! सीधे अल्लाह के पास रवाना हो जाओगे! चेतावनी नहीं गोली चल रही है!
चड्डी-वड्डी लेकर आना, सुना है कि जन्नत में भारी मांग है! 

बेटा मोदी बिना बोले इतना कर रहा है तो सोचो कि अगर बोलकर करे 100 करोड़ लोगों का सपोर्ट पाकर सेना बिना सोचे समझे रवाना करने लगेगी!

अभी मोदी ने धारा 35ए में धीरे से उंगली डाली है तो तुम्हारी महबूबा इतना उछल रही है!
सोचो कि अगर 370 में बंदूक की नली घुसाएगा तो क्या करोगे? अभी वक्त है अच्छे से प्लान बना लो नहीं तो सोचने का भी समय मोदी नहीं देने वाला!

धारा 370 पर एक्शन हुआ तो कश्मीर में सबसे पहले अंबानी कूदेगा और कश्मीरियत और इस्लामियत की धज्जियां उड़ा कर रख देगा! होटल रेस्टोरेंट और हॉलीडे पैलेस के लिए घाटी की शान होगी! कट्टरपंथ का हलाला हो जाएगा बिजनेसमैनों के हाथों!

पाकिस्तान की नाजायज औलाद बनने की जल्दी में घाटी से ही आजाद हो जाओगे! पाकिस्तान एक घास भी उखाड़ नहीं पाएगा कश्मीर में सेना के रहते! गलती की तो इंडियन बम ही गिरेगा ऊपर से और नाम पाक का होगा! इंडियन दिमाग है बेटा, खुराफाती तो होगी ही!

ज्यादा उछल कूद मत मचाओ! आतंकवादियों का एनकाउंटर हो रहा है, चुपचाप उसका समर्थन करो!
पत्थरबाजी की चुतियापा की तो मोदिया दिल्ली से बैठ कर सब देख रहा है! इशारा हुआ नहीं कि पिछवाड़े में बम घुसाकर उड़ाने लगे जाओगे!

Image result for army beating stone peltor imageबदलाव देखो बेटा, की पहले आतंकियों को पकड़ा जाता था अब गोली मारने के साथ साथ मोहल्ले को भी उड़ा दिया जा रहा है! मोदी इजराइल घूमने नहीं गया था पूरा इंतजाम करके आया है!
सेना का स्टाइल बिल्कुल मोसाद वाला लग रहा है!

जनता बदली तो मोदी आया! मोदी बदला तो सेना का स्वाभिमान बदला! और अगर सेना बदली तो कश्मीर बदलेगा, कश्मीर का झंडा बदलेगा और शान से हमारा तिरंगा लाल चौक पर फहराकर सेना की सलामी लेते हुए वंदे मातरम की धुन पर हवा में इतराते हुए पाकिस्तान की मां की आंख कर देगा...
जय_हिंद

✍ अश्वनी ©



29 June 2017

असली दोगले आजादी गैंग

Image may contain: 8 people, people smilingकभी दोगले को देखा है सुना तो बहुत बार है कि दोगले होते हैं! दोहरा चरित्र होता है दोहरी मानसिकता होती है दोहरा रवैया होता है, लेकिन असली दोगले को देखने की सहनशक्ति किसी राष्ट्रवादी में तो नहीं हो सकती.
गाय एक पशु है वह माता हो नहीं सकती, लेकिन भोजन जरूर हो सकती है! गाय के लिए किसी को मारना हत्या हो सकती है लेकिन उसके लिए गाय को मारना एक पुण्य का काम माना जा रहा! जुनेद मारा गया अयूब पंडित मारे गए लेकिन देशद्रोहियों के अंदर पनप रही नफरत को नहीं मारा जा रहा! 
दोगले की पूरी फौज जंतर मंतर पर आती है और अयूब को लेकर प्रदर्शन करती है लेकिन राष्ट्रवादी फेसबुक और ट्विटर जैसे वर्चुअल दुनिया में खूब धूम मचा लेते हैं मगर उनकी अवकात कुछ भी नहीं ! देश में एक नई सहिष्णुता का दौर शुरु हुआ है जिसमें किसी की मां को गाली दी जाती है किसी की मां समान माता को खा कर डकार लेे रहे और खाने की आजादी बता रहे। हिंदू उछल-कूद तो खूब मचा लेते हैं मगर मुसलमानों और वामपंथियों के जुनून के आगे फिसड्डी है।
सरकार को कोसने के बजाए इन साले आजादी गैंग को मजा चखाना बेहद जरुरी हो गया है।
जहां भी देखो डंडा निकालो मारना शुरू करो! ज्यादा चीखे तो लंगटे करके पीटो!
सामाजिक बहिष्कार करो कश्मीर और सेना पर दोगलापंथी दिखाने वाले लोग हो या नेता या कोई सबकी बजाओ!
ऐसे लोगों के खिलाफ छदम युद्ध छेड़ो !
खिलाफत का माहौल पैदा करो !
देखा नहीं कि मारना शुरू!
BJP की सरकार है तो ठीक, नहीं है तो अंधेरे का फायदा उठाओ पीछा करो बिहारी स्टाइल में माथे पर बोड़ा ओढाओ पेंट नीचे करो और दे दना दन!
तब तक करो जब तक साले सब अपने अपने अवार्ड वापस में कर दे !
कुछ दिन खूब हल्ला मच जाएगा लेकिन राष्ट्रवादियों को ठंडा नहीं पड़ना है क्योंकि गर्म तवे पर रोटी जल्दी पकती है!
सरकार पर भरोसा करने से काम नहीं चलेगा!
सरकार के साथ जनता को भी काम करना होगा. जनता सुप्रीम है !
जैसे मन है वैसे एक्शन लो बस कानून का ध्यान रखना है और संविधान कि सही व्याख्या कर देना है!
सेना का मनोबल बढ़ाओ जहां जवान दिखे फौरन सैल्यूट ठोको .
बस ट्रेन में तत्काल जगह खाली करो! एक नई जोश पैदा करो वह जोश गद्दारों के खिलाफ काम में आएगी!
प्रदर्शन और सरकार के कामकाज रोकने से कोई फायदा नहीं होने वाला! पता है सरकार राष्ट्रवादी है, लेकिन दोगले उसे मजबूर कर रहे हैं इसीलिए फालतूबाजी हवाबाजी बंद करो ।
इजराइल और मोसाद पर जितने ज्ञान हम पेल रहे हैं वो मोदी ने 20 साल पहले सोचा होगा!
इसीलिए डरो मत डराओ !                           
सबको आजादी दो ना मांगे तो भी दो ठूंस-ठूंस के दो! सुबह जब खेत में तकलीफ होगी साले अगली बार आजादी मांगना भूल जाएंगे...
पीटने_की_आजादी
बाकी आप कमेंट में सुझाव दे सकते हैं...

अश्वनी ©


14 August 2016

क्या तिरंगा देशभक्ति का प्रतीक है?

तिरंगे को देशभक्ति का प्रतीक होना कई सवाल छोड़ जाता है| भारत राष्ट्रराज्य की पहचान तिरंगे से मानी जाती है| विदेशों में नेताओं और राजनयिकों की पहचान भी तिरंगे से ही है तो वही देशप्रेम की चिताओं में जलने वाले शहीद जवानों का कफ़न भी| देशद्रोहियों के लिए विरोध जताने का एकमात्र कारगर हथियार तिरंगे को जलाकर फोटोशूट करवाना है| दुनिया में हर देशों के अपने-अपने झंडे हैं और उनकी अपनी अलग-अलग उपयोगिता| पर भारत में झंडे या देशप्रेम-राष्ट्रभक्ति को झंडे से जोड़कर जितना हल्ला मचता है वो किसी और देश में नहीं|
हर बार की भांति इस बार भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तथाकथित राष्ट्रभक्त इसी तिरंगे के नीचे खड़े होकर देश का गुणगान करेंगे, जिसने तिरंगे के रंगों को धर्मों के बीच बांटा| केसरिया रंग हिन्दू का है तो हरा मुसलमान का| बीच में बचे हुए अशोक चक्र को भी तो जातियों ने अपना-अपना घोषित कर रखा है| इन्सालाह भारत तेरे टुकड़े होंगे, भारत की बर्बादी तक जंग करेंगे जैसे नारे किसी को देशभक्त या शहीद से ज्यादा मूल्यवान बना सकता है| इस आजाद भारत के डीएनए में इस वैचारिकता का जहर उस परिवेश से आया जिसमें हमारा भारत पिछले 70 सालों से आजादी का जश्न मना रहा था| पर हम भूल गए की तिरंगे को या भारत को बांटने की बात करना किसी को जबरदस्ती राष्ट्रवादी बना सकती है... ये हमारे आज के आजाद भारत की हकीकत है|

फिर बात आती है की क्या तिरंगा देशभक्ति का प्रतीक है? क्या तिरंगे को जनता के लुटे हुए पैसों से खरीदी गाड़ियों पर लगा देने से वो देशभक्त हो जाता है? या फिर देश की बर्बादी का समर्थन करने वालों के लिए इस एक दिन झंडे के नीचे आजादी का जश्न मना लेना उसके देशप्रेम का सबूत बन जाता है? अगर ऐसा है तो हमारा राष्ट्रीय ध्वज देशभक्ति का प्रतीक कम और अनैतिकता, स्वार्थ और कुकृत्य के कर्मों का पर्दा ज्यादा लगता है...  कभी असली देशभक्तों से जाकर पूछिए, हमारे वीर जवानों से जाकर सीखिए की तिरंगे को देशभक्ति और देश के आन-बान-शान का ताज कैसे बचाकर रखा जाता है...

लेखक:- अश्वनी कुमार, जो ब्लॉग पर ‘कहने का मन करता है’ (ashwani4u.blogspot.com) के लेखक हैं... ब्लॉग पर आते रहिएगा...



आजादी की अपनी गाथा

देश को जब आजादी मिली तब मैं पैदा नहीं हुआ था| स्कूली किताबों से, कहानियों से, कविताओं से और देशभक्ति फिल्मों को देखकर-सुनकर आजाद होने का पता चला| हम स्वतंत्र भारत में जीने वाले लोग हैं, जहाँ स्वतंत्रता के नाम पर या आजादी के नाम पर कितनों को ठग लिया जाता है, लुटा जाता है, मारा जाता है और फिर हर 15 अगस्त या 26 जनवरी को तिरंगे के नीचे खड़े होकर उसी आजादी का जश्न भी मनाया जाता है| धर्म और जातिवाद का अफीम समाज को सदियों से मदहोश करता आया है| ये मदहोशी उस पाखंडी सम्प्रदायवाद और जातिवाद के संकीर्ण विचारधारा का परिणाम है, जिसमें लोग ईश्वरीय व्यवस्था का झूठा नारा देकर लोगों की आजादी को छिनने का प्रयास कर रहे हैं| आजादी के नाम पर अपनी व्यवस्था थोपने का ढोंग रच रहे हैं|

राष्ट्रवाद और देशप्रेम के परिभाषाओं में बड़ा अंतर पनपने लगा है| देशप्रेम के गहरी खाई के दोनों ओर खड़े विपरीत मानसिकता लिए तथाकथित राष्ट्रवादी लोग एक-दुसरे को देशद्रोही घोषित कर रहे हैं| पर कोई इंसानियत के नाते इस देशभक्ति के गड्ढों को पाटने के कोशिश भी नहीं करता| इनलोगों के झगड़ों में कई नेता और दल उसी गड्ढे की मिट्टी से अपना घर लीप कर गड्ढे को और गहरा बना दे रहे हैं| भारत राष्ट्र राज्य की बनावट इसकी ख्याति रही है| इसका सामाजिक तानाबाना दुनिया में अलग पहचान की वजह है| लेकिन इसी सामाजिक तानेबाने पर लोगों की व्यक्तिगत महत्वकांक्षा भारी पड़ रही है| हिन्दू मुसलमान को मार रहा है और मुसलमान हिन्दुओं को| दलितों को सवर्ण मार रहा है तो सवर्णों को पुलिस, नेता और व्यवस्था| पश्चिम वाले उत्तर वाले को देखना नहीं चाहते तो पूरब वाला उत्तर वाले को देखना बर्दाश्त नहीं|

देश में एक संविधान है जैसा भी है लोगों को कायदे से चलना सिखाता है| पर हकीकत बहुत भयावह है| देश के हर कोने में हर लोगों का अपना संविधान है| इसलिए की कहीं धर्म के नाम पर लोगों को उजाड़ दिया जाता है तो कहीं भाषाई आधार पर मजदूरों को पिट दिया जाता है तो कहीं संस्कृति का हवाला देकर धार्मिक कपडे न पहनने वाली महिलायों को सरेआम कूट दिया जाता है| देश के संसाधनों को अपना बताया जा रहा है, हर क्षेत्र को किसी न किसी ने उसे अपना जरूर घोषित कर रखा है| आजादी का नाम पर आजाद लोगों का शोषण हमें डरा देता है की कहीं अंग्रेज फिर से न आ गए हों| पुलिस, प्रशासन, जज या अफसर सभी का अपना संविधान, अपना कानून है| वे अपने बनाए नियम कायदे से चलते हैं| गाँधी की फोटो के नीचे मिठाई के नाम पर करोड़ों का धंधा चल रहा है| फिर तो गाँधी की विचारधारा फ़ालतू और बकवास सी भी दिखती है|

आजादी के नाम पर जनता को ठगने का इतिहास काफी पुराना है| हर वर्ष देश के प्रधानमंत्री लाल किले से वादों की फुलझड़ी से देश को रोशन करते हैं| सब बेहतर कर देने का भरोसा अतीत के सारे घोटालों पर पर्दा लगा देने जैसा है| फिर भी जनता हर वर्ष प्रधानमंत्री के भाषणों को सुनकर झूम जाती है लेकिन उसे महसूस करते-करते अगला स्वतंत्रता दिवस चला आता है|

क्या गाँधी जी ने जिस आजाद भारत की कल्पना की थी वो वाकई में यही भारत है? गाँधी के आदर्शों का बखान करते-करते उनके चापलूसों ने अपनी सहूलियत के हिसाब से संविधान बनाया, कानून बनाया और जनता पर राज करते रहे की साजिश रची| सिस्टम के नाम पर हर चौक-चौराहे से लेकर बड़ी-बड़ी इमारतों में डंडे देकर अपने पहरेदार बिठाए| उन्हें लाठी देकर जनता की आजादी को छिनने का पूरा इंतजाम किया| चुनावों के वक्त जनता के लुटे हुए पैसों से उसके उम्मीदों को सफ़ेद बनाया जाता है| बेशक, इस आजाद भारत की जनता अपनी आजादी का मूल्य जानती है, समझती है पर गरीबी और अशिक्षा के कारण सबकुछ स्वीकार कर लेना उसकी मजबूरी है| क्योंकि उसे पैसे चाहिए, शराब चाहिए और सिस्टम की मार से बचने के लिए किसी पार्टी का झंडा भी चाहिए|

आजाद भारत की गाथा इस आधुनिक दुनिया में स्कूली किताबों या नेताओं के भाषणों
के सहारे नहीं टिक सकती| झंडे लहरा देने से कोई देशभक्त नहीं हो जाता| राष्ट्रवाद और देशभक्ति का जूनून लोगों में एक दिन झंडे के नीचे खड़े हो जाने से नहीं आता| या फिर हथियारों के प्रदर्शन से कोई अपनी देशभक्ति की विचारधारा यूँ ही नहीं बदल देता| क्योंकि देश में राष्ट्रवाद की आड़ में इतनी साजिशें रची जा रही है की हमारी आनेवाली पीढ़ी तो इस एक दिन भी देश पर गर्व करने से कतराएगी...

क्या वास्तव में भारत वही धरती है जहाँ बुद्ध, महावीर जैसे शांतिदूत, चाणक्य जैसा पथप्रदर्शक या सम्राट अशोक, महाराणा प्रताप, भगत सिंह, आजाद या बोस जैसे वीर पैदा हुए थे...   अगर हाँ तो इस महान धरती की मिट्टी में जहर किसने घोला? बंजर बनाने की साजिश किसने रची? जबाव हमें पता है फिर भी ढूंढने का ढोंग करना पडेगा... क्योंकि उनके वंशज भी अभी मौजूद हैं और इन महान वीरों के भी, देखते हैं जीत किसकी होती है... 


लेखक:- अश्वनी कुमार, जो ब्लॉग पर ‘कहने का मन करता है’
(ashwani4u.blogspot.com) के लेखक हैं... ब्लॉग पर आते रहिएगा...