07 April 2021

महिला दिवस

 

प्रकृति की सबसे खूबसूरत कृति नारी को माना जाता रहा है | अनादि काल से हमारी परम्पराओं की पोषक, हमारी सभ्यता की जननी एवं भारतवर्ष की संस्कृति की रक्षक नारी शक्ति ही रही है |

दुनिया की सबसे पुरानी सिंधु सभ्यता के साक्ष्य मातृसत्तात्मक समाज की है |

वैदिक काल में लोपामुद्रा, गार्गी, मैत्रीई एवं अपाला जैसी विदुषी नारी का उल्लेख मिलता है, जिन्होने बड़े बड़े प्रकांड विद्वानों को ज्ञान से पराजित किया | नारी सशक्तिकरण का इतना शानदार उदाहरण दुनिया की किसी सभ्यता में नहीं मिलती | यह उदाहरण तब की है जब 1500 ई पू के लगभग का वह दौर जहां इन विदुषियों का डंका बज रहा था, उस वक्त पश्चिम और मध्य एशिया में मानव जाति चलना ही सीख रही थी |

फिर मौर्य काल के दौरान प्रशासन में स्त्रियॉं की स्थिति भी काफी अच्छी थी, उन्हें गण, सभा इत्यादि में बराबरी का दर्जा प्राप्त था और स्त्रियाँ काफी बढ़ चढ़ कर हिस्सा भी लिया करती थी |

धीरे-धीरे मध्य एशिया की बर्बर काबिलियाई लोगों ने रक्तपात मचाया और लोग महिलाओं को उनकी सुरक्षा के लिए चहरदीवारी के अंदर रखने को मजबूर हो गए | इतिहास में हमें महिलाओं के पिछड़ेपन की जो कहानी रची गयी है वो शायद ही सच हो, क्योंकि हमारे यहाँ माता मानकर पूजे जाने वाली कन्याओं की ऐसी दोयम स्थिति सोचे जाने तक की अनुमति हमारे वेद, पुराण भी नहीं देते |

नारियों के विरुद्ध शोषण और अत्याचार को रोकने को रोकने के लिए हमारे तमाम महापुरुषों ने सामाजिक कुरीतियों को दूर किया और अब हम technology और globlisation के दौर में पुनः उस स्थिति में पहुँच चुके हैं जहां से नारियों को फिर से बराबरी का अवसर मिल रहा |

आज हमारी महिला शक्ति लड़ाकू विमान उड़ा रही, सेना के सशत्र बलों में महिला टुकड़ी बन रही, कोई मणिपुरी किसान की बेटी और तीन बच्चों की माँ मुक्केबाज़ी की विश्व चैम्पियन बनी बैठी है और दुनिया जिसे मैरीकॉम के नाम से जानती |

समाज के हमेशा से दो चेहरे रहे हैं, समाज खासकर जब पित्रसतात्मक हो जाता है तो उसकी मानसिकता काफी जघन्य हो जाती है | ऐसे लोग न केवल नारियों के लिए संकट बनकर उभरते हैं बल्कि ऐसे लोग देश, समाज और संस्कृति की नींव को ही काट डालना चाहते | फिर उसी समाज का एक चेहरा तब दिखता जब शक्ति की पुजा की जाती या बेटियों की बिदाई करते चेहरे को देखा जाता |

देश के कई क्षेत्रों में अशिक्षा की वजह से आज भी लड़कियों की पैरों में बेड़ियाँ जकड़ने का प्रयास जारी है | घरेलू हिंसा इसी समाज की सच्चाई है... लैंगिक भेदभाव, छेड़छाड़ जैसी राक्षसी प्रवृति इसी समाज की घिनौनी सच्चाई है...

नारी शक्ति को पश्चिम के अंधानुकरण से बचना होगा | जब वे हमारी संस्कृति को अब तक सीख रहे हमारी आर्ट ऑफ लिविंग को सीख रहे तो हमें उनसे सीखने की कोई जरूरत नहीं | नहीं तो पश्चिम के पुरुषों की तरह यहाँ भी तलाक, धोखे जैसे शब्दों का प्रचलन बढ़ता जाएगा |

पुरुषों की बागडोर महिलाओं के हाथों में ही होती, उसे नियंत्रण में रखना, ज़िम्मेवार बनाना माँ के रूप में नारी की ही जबावदेही होती |

बेटियों को स्वच्छंद आकाश में उड़ने दो ! समाज बगुले की तरह ताकता रहेगा…

नारी खुद को कम न आंके ! इनकी हकीकत मर्दों से कई गुना बेहतर और प्रभावी है !










20 February 2021

● ई-मोबिलिटी ●


पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों पर आम आदमी की चिंता जायज है ! सरकार की आय का बड़ा स्रोत इस पर लगने वाला टैक्स ही है ! इसी टैक्स के पैसे से सरकार चलती है, सड़कें बनाती है, पुल का निर्माण होता है और राफेल-अपाचे खरीदे जाते ! सेना की गोली, पुलिस की लाठी तक तो इसी से आती है !
नेताओं अफसरों के वेतन भत्ते का जुगाड़ इसी से होता ! आम आदमी हर चीज खरीदने पर टैक्स सरकार को देता.. 
जो अमीर है वो लैविश चीजें खरीद कुछ ज्यादा ही खजाना भरने में अपना योगदान देते !

दुनिया की अर्थव्यवस्था में तेल का खेल महत्वपूर्ण है.. रेगिस्तानी अरब देश आज इसी तेल के बदौलत शेखी बघार रहे ! अमेरिका के पास अपने इस्तेमाल को प्रचुर तेल है इसलिए वह कहीं भी कभी भी हमले करने की मुद्रा में सदैव खड़ा मिलता !
रूस के पास अथाह भंडार है अतः उसे भी दुनिया से कोई मतलब नहीं.. 
दुनिया की अर्थव्यवस्था का गणित तेल और सोने पर ही निर्भर है !
डॉलर को जबरदस्ती दुनिया पर लादे रखने में अमेरिका कैसे सफल रहा ये उसकी युद्धनीति से समझा जा सकता !

मगर अब ये चीजें बहुत जल्दी अव्यवहारिक हो जाएंगी ! नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों पर दुनिया काफी तेजी से रिसर्च कर रही है ! सौर और लिथियम का बेजा उपयोग दुनिया की अर्थनीति को बदल कर रख देगी !
तमाम महाशक्तियों का अंत निश्चित है.. तेल आधारित geo-politics का कोई भविष्य नहीं दिखता और ये सारी चीजें बीते दिनों की बात हो जाएगी..

जिस तरह से भारत नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों पर कार्य कर रहा वो किसी अकल्पनीय दूरदर्शिता से कम नहीं है ! लिथियम उत्सर्जन के लिए सरकार ने हाल में बेहतरीन नीति बनाई हैं जिसपर शायद ही किसी ने ध्यान दिया !
सारे सरकारी कार्यालयों में सौर उपकरणों से ऊर्जा की आपूर्ति की व्यवस्था की जा रही ! ई-vehichle विनिर्माण क्षेत्र के विशेष छूट का प्रावधान और लिथियम आपूर्ति के विभिन्न देशों के साथ करार के फलस्वरूप हम बहुत गौण रूप से इन पेट्रोल डीजल इरा से दूर जा रहे..

आज तेल की बेहताशा कीमतों से हम भले ही परेशान हैं मगर जैसे ही ई-ट्रांसपोर्टेशन में क्रांति आयी मतलब तेल से निर्भरता हटी यानी हम आत्मनिर्भर हुए वैसे ही एक नई टैक्स क्रांति के लिए तैयार रहना होगा !
सरकार का राजस्व रुकेगा वो नई नई व्यवस्थाएं थोपने को मजबूर होगी.. हमें टैक्स के द्वारा ही सरकार की घाटे की पूर्ति करनी होगी..

दुनिया बहुत फ़ास्ट होने वाली है ! क्रिप्टो करेंसी द्वारा डॉलर की बादशाहत खत्म होगी.. परमाणु ऊर्जा से कोयले की और ई-वाहन से तेल के बादशाहों की !
संभव है कि भारत इसी के बदौलत महाशक्ति बनने की काबिलियत रखता है और अगले एक दशक में हम निश्चित महाशक्ति बनकर वैश्विक पटल पर उभर रहे होंगे.. 
#जय_हिन्द 🇮🇳

05 February 2021

● व्यापारी किसान ●


हमने इतिहास के किताबों में बहुत सारे किसान आंदोलनों पढ़े की कैसे अंग्रेज, जमींदारों के माध्यम से कृषकों का खून चूसते थे ! उनसे व्यापारिक फसलों की जबरन खेती कराई जाती और फसल का आधा तक हिस्सा रख लिया करते थे ! खेत बंजर हो जाती थी, ऊपर से कर्ज का जाल बिछा भूमिहीन बना दिया जाता था !

आज 21वीं शताब्दी में भी आधुनिक किसान आंदोलन शुरू की गई है ! मगर इसका लक्ष्य, संघर्ष और आंदोलन की जीवटता देख आने वाली पीढियां कांप जाएंगी !
की कैसे मंडियों को बचाने के लिए लाल किले तक चढ़ाई की गई ! दलाली प्रथा बचाये रखने को दिल्ली की सड़कों पर ट्रैक्टर से लंगई की गई !
कृषि का अस्तित्व बचाये रखने के लिए मिया खलीफा जैसे महाशक्तियों को आंदोलन में आना पड़ा ! सच बोला जाए तो सभ्य लोग गुस्सा हो जाएंगे.. रेहाना जैसी कृषि विशेषज्ञों को मैदान में उतरना पड़ा ! अलग बात है कि रेहाना जैसे शक्ल की लड़कियों को यहां के ठेले लगाने वाले स्वाभिमानी लौंडे तक रिजेक्ट कर देते ! 
ग्रेटा बेबी को भारत की चिंता हो रही, अलग बात है की भक्तों ने डेटा चुरा ली !

मगर देश में अंतराष्ट्रीय स्तर के आंदोलन होने के बाबजूद भी सरकार की भूमिका मौनी बाबा की हो गयी है ! कोइ मतलब नहीं है, तोड़ रहे हो तोड़ने दो, भौक रहे हो भौंकने दो !
ऐसे नही करना चाहिए ! बिल्कुल गलत हो रहा इनलोगों के साथ...
इस स्थिति में हम राष्ट्रवादी सरकार का समर्थन नही कर सकते ! 

इन्हें देश की सरजमीं पर बैठ उसमें छेद करना है !  कॉर्पोरेट को देश से भागना है मगर उनके ट्रैक्टर पर बैठ सड़कों पर नंगई करनी है, पब्लिक प्रॉपर्टी तोड़नी है ! 
टैक्स एक पैसे का नही देना मगर हमारी टैक्स से MSP लेनी है !
हर चीज में छूट लेनी है, आह हम अन्नदाता...

किस बात का अन्नदाता बे ? तुमलोग व्यापारी हो अन्न जैसी पवित्र चीज का ! सैकड़ों एकड़ जमीन पुरखो से खैरात में मिली जो उसने किसी गरीब असहाय से कभी छीनी ही होगी, उसपर तुम कितने घण्टे खेती करते हो ? कभी मेहनत किये हो खेतों में, कभी पानी तक भी नही पटाये होंगे ! 
UP बिहार से हमारे असली किसान मजदूर बनकर तुम्हारे खेतों में खेती करने जाते ! अपने पसीने से इस भारतवर्ष की मिट्टी को सिंचते.. तब तुम कितनी आसानी से फोन घुमा माल बेच करोड़ो कमा लेते !
न तो टैक्स भरने की लत है न ही मेहनत करने की ! दूसरों से छीनी गयी जमीन पर दूसरों से मजदूरी कराकर घर बैठे घी खा तोंद पाल किस हक से खुद को किसान कह रहे हो ! 
तुमने दिल्ली की सड़कों पर नंगई की क्योंकि तुम्हारे पास ट्रैक्टर है ! उस ट्रैक्टर पर सरकार अन्नदाता के नाम पर टैक्स में भारी छूट देती ! इधर कभी उत्तर भारत में आकर देख लो असली किसान को ! खुद का पेट भरने को खेती होती है थोड़ी सी कट्ठे की जमीन पर या पट्टे पर लेकर ! 
आवास योजना से अब तो सरकार घर भी बनवा देती, नहीं तो फुस की झोपड़ी में कोठी ही दिखती थी ! जिसमें हमारा असली अन्नदाता अपनी पूंजी रखता था ! कर्ज लेकर ट्यूबवेल खुदवाये जाते यहां, बीज-तेल खरीदने तक को पैसे उधार में लेने पड़ते हैं !

मगर यहाँ का किसान तो कोई विरोध नहीं कर रहा ! क्यों सरकार तुम्हारे मोटे अनाजों को खरीद PDS सिस्टम द्वारा 2 रु किलों बेचने को मजबूर होती रहेगी ! PDS सिस्टम जिस दिन देश से हटा 50% करप्शन फिनिश ! सबसे बड़ी लूट का अड्डा यही है और उसी अड्डे को बरकरार रखने को गला फाड़ रहे... 

सरकार ने इस आंदोलन को बढ़ावा दिया ! अतिसहनशीलता घातक हो रही, सरकार की समझ और दूरदर्शिता समझ से परे हो रही है ! संभवतः लंबे प्रोजेक्ट पर काम चल रहा..
लेकिन किसान का नाम तो बदनाम कर दिया इन लोगों ने ! अन्नदाता के नाम पर लोग 'चल हट्ट बे' करने की स्थिति में आने लगे हैं... बाकी देखते जाओ... 
#जय_हिंद 🇮🇳

29 January 2021

● गणतंत्र के गुंडे ●


आज दिल्ली की सड़कों पर जो गुंडों की गुंडई दिख रहा वह भारतीय संविधान के अति लचीला होने की वजह से है !
आज ही के दिन भारत के संविधान लागू होने के उपलक्ष्य में हम 72 वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं मगर दूसरी ओर किसानों के नाम पर दल्लों की नंगई से ये देश शर्मसार हो गया !

पंजाब से देश नहीं चलेगा भाईसाहब !
देश अपने संविधान, नियम कायदे से ही चलेगा !
हंगामे-उपद्रव करने से कानून भी वापस नहीं होता मगर पिछवाड़ा जरूर टूट जाता.. 
कहने को तो विधि का शासन हैं मगर हमारी सरकार ने बेहद लुंजपुंज तरीके से इस मामले को हैंडल किया है.. 
एक 2-4 हज़ार मंडी के दलालों ने दिल्ली बॉर्डर डेढ़ महीने से घेर रखा है और वार्ता पर वार्ता किये जा रहे ! मतलब संसद के बनाये कानून को न मानने के लिए इतना हौंसला कहाँ से आ रहा..

बेचारे किसान नित्य खेतों में काम करने वाले उन्हें क्या पता कि कानून नियम व्यवस्था आदि क्या होता ! साधारण बात है कि इस कानून से तकलीफ बिचौलियों को होने वाली है जो आम भाषा में दलाल कहे जाते हैं..
सरकार की मजबूरी है कि पंजाब के अनाजों को जनता में फोकट का न बांटे तो सड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है !
कल को हर up बिहारी सड़कों पर बैठ जाये कि ये पंजाब वाले मोटे खद्दर अनाजों को हम कोटा(जनवितरण) में नहीं लेंगे तो क्या ! 
फैक्टरियां हमारे यहां लगाओ नहीं तो कहीं काम करने नहीं जाएंगे और दिल्ली घेर के बैठ जाएंगे.. तब क्या !

पंजाब के खेतों में काम करने, मेहनत मजदूरी करने वाले up बिहार के मजदूर ही तो असली किसान हैं, ये लोग जो सड़कों पर 4 फिट के तोंद वाले अंकल उपद्रव कर रहे ये तो सैंकड़ों एकड़ जमीन वाले व्यापारी हैं.. 
सम्भवतः मेरा अनुमान सही था कि सरकार ने ट्रैक्टर आंदोलन की अनुमति देकर बड़ा गेम खेला है.. उसे पता था कि उपद्रव निश्चित है, और इन लोगों के असली चेहरे को सामने लाने का मौका भी !

हमने दिल्ली के अंदर योगी बाबा जैसे कुशल प्रशासक की कमी महसूस की जो शायद गणतंत्र के दिन अपने गणों की रक्षा कड़ाई से कर पाता !
हमें इस गणतंत्र की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाना चाहिए..
अन्यथा ऐसे आंदोलनों की आड़ में देश को बर्बाद करने की कोशिश की जाती रहेगी.....
#जयहिंद 🇮🇳

16 January 2021

विश्वगुरु की राह पर भारत 🇮🇳

भारत ने 21वीं सदी के मध्य तक महाशक्ति बनने का मार्ग आज प्रशस्त कर लिया ! सदी की सबसे बड़ी महामारी पर विजय हासिल कर हम अपने 130 करोड़ देशवासियों के साथ विश्वगुरु की राह पर चल चुके हैं !
हमने पहले ही संभावना जताई थी कि कोरोना काल भारत जैसे देश के लिए वरदान साबित न हो जाये ! जबकि यही पश्चिमी देश अपना हश्र देख हमारी बड़ी आबादी के लिए नकली चिंता करते दिख रहे थे !

आज से दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन प्रोग्राम भारत ने शुरू कर दिया ! 
दुनिया में सिर्फ 5 देशों ने कोरोना की वैक्सीन बनाई है ! सबसे सटीक और सस्ती वैक्सीन अपने राष्ट्र के नाम रहा !
ये ताकत वास्तव में हमारे वैज्ञानिकों को उन्हीं ताली, थाली, घण्टी और दीये से मिली जिसकी कभी मजाक उड़ाई गयी ! सनातन परंपरा का उपहास किया गया ! 

आज दुनिया के 100 से अधिक देश भारत से इन वैक्सीन की मांग कर रहे.. मगर सरकार ने शानदार कूटनीति का परिचय देते हुए पहले पड़ोसी देशों को प्राथमिकता में रखा है ! 
भारत की आगे की विदेश नीति पर निश्चित तौर पर इन वैक्सीन के दूरगामी परिणाम दिखेंगे ! श्रीलंका और नेपाल सरकार भारत का उपकार मानकर लहालोट हो रही !

चीन दुनिया मे मक्कार साबित हो चुका है ! चीन उससे भी ज्यादा इस सदमे में है कि उससे भारत के 130 करोड़ आबादी का बाजार हाथ से निकल गया.. जिसे वो अपनी नकली वैक्सीन बेचता ! यही हाल अमेरिका का भी है.. 

मतलब ये महाशक्तियां भारत की सफलता से बिल्कुल अचंभित है.. फाइजर कंपनी की तो पीजे दांत से सीरम और भारत बॉयोटेक ने शिकार छीन लिया है.. 
ये अभूतपूर्व सफलता हम हिंदुस्तानी को गर्वित कर रही है..
मात्र 6 साल की सरकार इतनी आत्मनिर्भर हो गयी है कि पाकिस्तान तक के न्यूज़ चैनलों में मोदी की प्रशंसा की जा रही है !

जैसी हमलोगों की आदत रही है लोग मानकर चल रहे थे कि बहुत बड़े बड़े पैरवी-पौवा वाले लोगों के बीच वैक्सीन के लिए मारामारी मचेगी.. फिर पार्टी के पद वाले, फिर चचा विधायक हैं वाले, फिर रोड पर गाड़ी पकड़ाते फोन घुमाने वाले नागरिकों के बाद ही आम आदमी का नंबर आएगा !

मगर यहां तो साला गेम ही उल्टा है ! कोई मारामारी नहीं, शांति से और सिस्टम से वैक्सीनेशन भी शुरू हो गया !
यकीन नहीं हो रहा कि यह वही इंडिया है जो पहले हुआ करता था..
मतलब जस्ट लाइक ऐज मिरेकल !!!

ये सारी सफलता की देन हम देशवासियों की है.. जिन्होंने मुश्किल समय में उन फ्रंट लाइन वर्कर्स के साथ खड़े रहे, उन्हें सम्मान दिया, उनकी हौंसलों को बढ़ाया...
फिर उस सरकार को साधुवाद जिसने देशवासियों के लिए अर्थव्यवस्था तक को दांव पर लगाने से नहीं घबराए.. चुपचाप इस समस्या पर विजय पाने के लिए वैज्ञानिकों का हर कदम पर साथ देते रहे और अंततः इस भारतभूमि के लालों नें देश का परचम लहरा ही दिया..

#जय_हिन्द 🇮🇳

09 January 2021

विदेशी एप्लीकेशन की मनमानी

हाल ही में व्हाट्सएप्प ने यूजर डेटा को अपने अन्य प्लेटफॉर्म पर साझा करने की जबरन अनुमति मांगनी शुरू कर दी है अन्यथा एकाउंट बंद करने की धमकी दे रहे ! 
130 करोड़ आबादी वाले देश में इन कंपनियों की दादागिरी आखिर किसकी शह पर चल रही है ? 

आंकड़ों के हिसाब से व्हाट्सअप के दुनिया भर में 20 करोड़ यूजर हैं, जबकि भारत में अकेले साल 2022 तक 82 करोड़ स्मार्टफोन यूजर हो जाएंगे !
फेसबुक, व्हाट्सएप्प चलाने वाले हर भारतीय का एक एक डेटा ये विदेशी कंपनियां न केवल चुरा रही बल्कि पश्चिमी देशों की पूंजीवादी विस्तार में परोक्ष मदद भी कर रही है !
हम क्या खा रहे, क्या पी रहे, क्या पहन रहे... हमें क्या पसन्द और क्या नापसन्द है ये सारी जानकारी बेच वे असीमित मुनाफा कमा रहे ! 

मतलब डेटा चोरी के लिए भारत जैसे विशाल आबादी वाला देश इन्हें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क कैसे मिला हुआ है ये बहुत गंभीर प्रश्न है ? सरकार डेटा प्रोटेक्शन के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करती दिख रही है ! अपने नागरिकों की निजता सुरक्षा हेतु बिना कोई कठोर नियम के इन कंपनियों को छूट दे रखी है.. 

उदाहरण के तौर पर आप फ्लिपकार्ट पर कुछ भी देखें, फिर थोड़ी देर बाद फेसबुक पर उसी समान को खरीदने का विज्ञापन अलग अलग कंपनियों की तरफ से आने शुरू हो जाएंगे !
आप जोमैटो से क्या आर्डर कर रहे, कहाँ किस किस रेस्त्रां में, पार्क में या शहर में जा रहे ये सारी जानकारी इन कंपनियों को पता है !
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल कर ये न केवल आपका ब्रेनवाश करने की कोशिश करते हैं बल्कि कई बार ऑफर देकर प्रोडक्ट खरीदने तक को मजबूर कर दे रहे..

किसी कूटनीतिक टकराव की स्थिति में ये सारी जानकारी के आधार पर शत्रु उन चीजों की सप्लाई लाइन आसानी से काट सकते जो भारतीय को ज्यादा पसंद हो या जरूरी हो !
या शत्रु देश को सारा डाटा पैसों के लिए बेच भी सकते ! 

सरकार डिजिटल इंडिया के माध्यम से कामकाज के तरीकों को तो सरल कर रही है परंतु इन विदेशी सोशल प्लेटफार्म का कोई विकल्प जनता को नही दे रही ! कौन सी कूटनीतिक लॉबी के आगे हमारी सरकार मजबूर है ये हमें अवश्य जानना चाहिए..
सरकार को डेटा प्रोटेक्शन एक्ट में व्यापक बदलाव करना होगा और इन मनमानी कर रही प्लेटफॉर्म्स को भारतीय कानून के हिसाब से चलने के लिए मजबूर करना होगा ! 

ऐसी राष्ट्रवादी सरकार इन झंडू कंपनियों को बस एक तिरछी नज़र से देख भी लेगी तो अमेरिका में हड़कंप मचना तय है ! 
सालों की ग्लोबल एजेंसी होने की सारी दादागिरी और तगमा धड़ाम हो जाएगा.. 
Pubg और tiktok का हश्र सबके सामने ही है !

भारत सरकार को इतने बड़े बाजार का अपने तरीके से इस्तेमाल करना होगा ! बाजार को ठेकेदारों के हाथों में देने से न सिर्फ व्यापारियों का शोषण होता है बल्कि जनता भी सरेआम व्यापारियों द्वारा ठगी जाती है...
कंपनी है उसे कंपनी की तरह रहने का निर्देश दें.. उगाही की धंधेबाजी में कहीं ये बाजार न खो दे !
अपने नियम कानून थोपने की कोशिश में कहीं मोदी की एक घोषणा मात्र रसातल में न पहुंचा दे...
हमारे लिए नियम कानून वहीं बनाएंगे जिसे हमने चुनकर भेजा है.. अनपढ़ है, गंवार है या मूर्ख है जो भी है वो अपना है, एक हिंदुस्तानी है... 
#जय_हिन्द 🇮🇳

08 January 2021

अलोकतांत्रिक अमेरिका

लोकतंत्र का असली मतलब अमेरिका को आज समझ आया होगा ! लोकतांत्रिक आजादी को हथियार बनाकर दुनिया के निर्मम देशों के ऊपर गुंडागर्दी करना इस अमेरिका की पहचान रही है ! बहुत ही निर्लज्जता से इसी अमेरिका ने बहुत सारे कमजोर राष्ट्रों की आर्थिक और राजनीतिक आजादी को बर्बाद किया है !

आज उनके नागरिक अगर अमेरिकी संसद में घुस उसे हाईजैक कर रहे, अराजकता फैला रहे और ताबड़तोड़ गोलियां चला रहे तो इसमें उनका कोई दोष नहीं ! ये उन्हें उनकी ही सिस्टम ने सिखाया है !

ट्रम्प की महत्वकांक्षा भी जायज है और बाइडेन की भी ! मगर किस बात की महाशक्ति देश भाई ? जिस देश की चुनाव प्रणाली एक सत्ता हस्तानांतरण तक नहीं करा पा रही !
4 गुना अधिक आबादी वाले भारत में बेहद शांतिपूर्ण तरीके से और कई बार 1 वोट तक से सत्ता का हस्तांतरण हो जाता है !
अपना घर सम्भलता नहीं और चले दुनिया का नेता बनने ! मतलब दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र में एक ढंग का चुनाव आयोग तक नहीं है !

खास बात ये है कि इस घटना की कई हिंसात्मक वीडियो में इनके मिलिट्री फ़ोर्स की एक्टिविटी बेहद निम्न स्तर की दिख रही ! 50 तरह के इक्विपमेंट लगा लेने से जिगर नहीं आता !
बिना हथियार-हेलमेट के आतंकियों से भिड़ जाने वाली आर्मी अपना रोल मॉडल है !
ऐसे छोटे मोटे उपद्रव हमारे इंडिया में रोज होते रहते हैं !

सरकार के खिलाफ गालीबाजी, प्रदर्शन और थोड़ा उपद्रव यहाँ लोकतांत्रिक आजादी में गिनी जाती है, मगर सत्ता के लिए ऐसा नंगापन कभी नहीं होता.. गर्व है अपने देश पर...
#जय_हिन्द





अंग्रेजी नववर्ष 2021

अंग्रेजी नववर्ष की सर्वप्रथम सेना को फिर सभी प्रिय राष्ट्रवादी मित्रों को शुभकामनाएं !
पिछले वर्ष की सारी समस्याओं को पीछे छोड़कर फिर से नई उमंग, जोश और जज्बे से हमें आगे बढ़ना है !
देश की शान को बरकरार रखते हुए 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की दिशा में इसे आगे बढ़ाना है !

हम आशा करते हैं कि सारी जटिल समस्यों का निदान धारा 370 वाली थ्रिलर में होगा !
सारे मुख्यमंत्री शासन का तरीका योगी महाराज वाली स्टाइल में बदल लें ! न्यायपालिका का पुनरुद्धार हो, पीढ़ी दर पीढ़ी प्रणाली समाप्त हो !
मोदी सरकार इसी तरह नित्य नए नए कानून लाकर सुधार करती रहे और नए नए आंदोलन जन्म लेते रहें ! और इनकी बिलबिलाहट देखकर राष्ट्रवादियों को ठंढक पहुंचती रहे !
वर्ष 2021 हम दो हमारे बीस की प्रथा समाप्त करने के लिए जाना जाए !
भ्रष्टाचारियों को त्वरित न्याय दिए जाने की व्यवस्था हो और कम से कम उम्रकैद हो !
IPC और Crpc के प्रोविजन आज के हिसाब से बदला जाए और काले अंग्रेजों से देश को सुरक्षित किया जाए !

यह वर्ष चुनाव सुधार के लिए भी जाना जाए ! सरकारी स्कूली शिक्षा का आधुनिकीकरण हो और नई शिक्षा नीति का अनुसरण हो !
स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक सुधार देखने को मिले ! डॉक्टरों को मानव सेवा के लिए बाध्य बनाया जाए, ई-हॉस्पिटल की व्यवस्था इसी वर्ष शुरू हो और निरीह लोगों तक स्वास्थ पहुंच की संकल्पना सार्थक हो !

सभी मित्र अपनी नौकरी, व्यवसाय और जिंदगी में ढेर सारी तरक्की करें ! आपका बैंक बैलेंस मैंटेन रहे... ईमानदार बनें रहें, अनपढ़ लोगों से अच्छा बर्ताव करें, लाचारों की सेवा करें और गरीबों के लिए भी थोड़ी मदद को तैयार रहें !
एक ईमानदार टैक्सपेयर होने के नाते आसपास हो रहे सरकारी लूट की जानकारी सही जगह पहुंचाएं...

पुनः आशा है कि इस नववर्ष हम एक अच्छे नागरिक, मतदाता और इंसान के रूप में स्वयं को समाज के सामने प्रस्तुत करेंगे..
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31 October 2020

● अयोग्य नौकरशाह ●


बिहार के मुंगेर में बीते दिनों हिन्दू श्रद्धालुओं पर पुलिसिया दमन की घटनाएं और प्रतिउत्तर के रूप में भीड़ का सरकारी तंत्र पर हमला नेचुरल जस्टिस के ही अनुरूप माना जा सकता है !
दुनिया का ही इतिहास देखें तो रूस, जर्मनी, थाईलैंड और कई अफ्रीकी देशों के तानाशाहों/राजाओं से जनता ने मुक्ति कैसे पाई ? सरकार में बैठ या सरकारी तंत्र का हिस्सा होकर आप आम जनता को अपना गुलाम नही समझ सकते तथा किसी भी स्तर पर आपका तंत्र उनका मुकाबला नहीं कर सकता ! और भारत जैसे लोकतांत्रिक देश जहां के नागरिक अपने मूल अधिकारों से हमेशा लैस होते हैं... उनपर तो कोई तंत्र सुप्रीम कोर्ट के रहते तो बाल भी बाँका नहीं कर सकता !

मगर माता के विसर्जन के दौरान ये सशस्त्र दमन यूँ नहीं हुआ !
UPSC ने पिछले 10-12 सालों के दौरान IAS-IPS जैसे उच्च अधिकारियों की नियुक्ति में निराशाजनक प्रदर्शन किया है ! व्यवहारिक ज्ञान वाले मध्यम वर्ग के कैंडिडेट की जगह पब्लिक स्कूलों में पढ़ने वाले और बाप के मर्सिडीज से स्कूल जाने वाले तोते को तरजीह दी है ! बाप या माँ अगर नौकरशाह हैं तो गारंटी टाइप हो गयी है कि बाल बच्चा तो यूपीएससी पास करेगा ही.. हाई रैंक न मिला तो IT कमिश्नर तो बनेगा ही...

नतीजा सबके सामने है.. DM साहेब और कई साहिबायें सड़क पर उतरकर सरेआम ऑन कैमरा आम जनता को थप्पड़ लगा दे रहे.. जरा सी बात पर गोलियां चलवा दे रहे, जनभावना से कोई वास्ता नहीं.. रईसों से या नेताओं के बेटियों से शादी कर आराम दे जिंदगी सेटल कर लेते हैं.. फिर न तो उनका नेता कुछ करवा पा रहे और जनता की पूछता ही कौन है !

मतलब देश के सबसे कठिन एग्जाम पास करने वाले इन नौकरशाहों में दमन की मानसिकता पनपती कैसे है ! जाहिर सी बात है कि कोई यूँ ही UPSC तो पास नही कर सकता, बल्कि भारतीय संविधान, समाज सहित देश दुनिया की तमाम जानकारियां बहुत गहरी तौर पर रखनी पड़ती है ! उस पर अपनी समझ, बुद्धिमता और तार्किक ज्ञान के बदौलत ही नौकरशाह बनते हैं ! 

तो आखिर किस आधार पर निहत्थी भीड़ पर लाठियां चलाई गई ? विसर्जन में शामिल नाबालिग युवा को सरेआम गोली मार दी गयी ?
फिर भीड़ ने जो प्रतिक्रिया अगले दिन किया वो स्वाभाविक है .. 
आपने कानून का पालन नही करने को इन निरीह जनता को प्रेरित किया ! 
सरकार अपने तंत्र के बदौलत चलती है, लोकशान्ति स्थापित करने हेतु पुलिस को असीमित शक्तियां दी गयी है मगर इसका मतलब ये कतई नही हो सकता कि आप संविधान की सीमा लांघकर दमन कर दें !
गोली चलाना पुलिस का अंतिम विकल्प है वो भी देश-राज्य के लिए खतरा बने भीड़ etc पर ! मगर यहां पहले विकल्प में ही गोली चला डाली गई वो भी निहत्थी श्रद्धालुओं पर सामने से ! मतलब आंसू गैस या अन्य प्रशासनिक उपायों की कोई आवश्यकता ही नहीं रह गयी है.. सरकार ने जनता के पैसों से गोली खरीद कर दी और जनता को वही गोली खिला दी गयी.. 

प्रकृति का नियम ही है प्रतिउत्तर ! किसी किट पतंग या निरीह जानवरों को परेशान करोगे तो उसे जितनी क्षमता होगी पंजों-दांतों से वो कोशिश जरूर करेगा सबक सिखाने !

सरकार को अपनी बहाली प्रक्रिया और नियुक्ति के बाद प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर विचार किये जाने की जरूरत है ! भीड़ प्रबंधन और आम नागरिकों के प्रति अधिकारियों की जबाबदेही सुनिश्चित की जा सके ! अयोग्य नेताओं से ये जनता तो पहले से ही परेशान है, अब कम से कम अयोग्य अधिकारियों को तो इनके सिर मत लादिये ! 
आम जनता के बीच से अपनी बुद्धिमता और कौशल के बदौलत पले बढ़े गुदड़ी के लालों को नौकरशाह बनाने पर जोर दीजिये..
देखिए आपका यही UP-बिहार के लौंडे फिर से देश को कैसे रफ्तार देते हैं...

#जय_हिंद

07 October 2020

● बिहार चुनाव 2020 ●


बिहार में चुनावी मंच सज गया है ! 
जनता फिर से मूकदर्शक की भूमिका में बैठ इन नेताओं की घटिया प्रस्तुति देखेगी ! आखिर बिहार की जनता इस बार मूक क्यों है ? देश की राजनीति में दहाड़ने वाले बिहारी बदलाव चाहते हैं या फिर से उसी सिहांसन को लादे रखना चाहते हैं ये परिणाम स्पष्ट करेगा !

महान बिहार के बारे में किसी को परिचय की जरूरत नहीं ! राजनीतिक बुद्धिमता वाले राज्य का ऐसा हश्र किसने किया ? 15 साल बनाम 15 साल की लड़ाई मिट चुकी है ! बिहारियों ने सबको देखा, दोस्त को दुश्मन और दुश्मन को दोस्त बनते देखा ! सत्ता के लिए लोकतंत्र  के पीठ में खंजर खोपे गए ! बिना जनता से पूछे हर वो काम किया गया जो शायद किसी न किसी को इस चुनाव में मिट्टी में मिलाएगी ही !
15 साल के जंगलराज को मिटाने की कसमें खाने वाले भी 15 साल राज कर गए !
बिहारी मतदाता खुद को राजनीति का चाणक्य होने का दम्भ भरता है, मगर किस आधार पर ? 
किस बात की पॉलिटिक्स जो खुद के अधिकारों के लिए अपने राज्य शहर गांव तक में लतियाये जा रहे ! 
बाहरियों के लिए श्रमिक राज्य बनकर रहे गए ! 
रोजगार, इंडस्ट्री, सुरक्षा शब्द से दूर दूर तक कोई सरोकार नहीं ! शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति या सच्चाई देखनी हो तो भाई साहब ग्राउंड पर उतरने से पहले नवरत्न तेल मलना होगा ! 

बिहार में आखिर बदला क्या ? खासकर कई क्षेत्रों में व्यापक बदलाव देखने को मिली, विकास की परिभाषा शुरुआती 10 वर्षों में समझ आयी !
● गांव गांव सड़कों का जाल बिछा डाला गया ! भले ही मरम्मत न हो या कमीशन खोरी कर के आधा पैसा डकार लिया गया मगर मिट्टी की फिसलन की जगह गिट्टी की सड़क तो बनी !
● दूर दराज के गाँव तक बिजली की सुविधा पहुंचाई गई ! ढिबरी एरा से जनता को उबारा गया !
● सबसे बेहतरीन योजना अगर कोई रही तो लड़कियों को साईकल और पोशाक देने की ! गाँव की गरीब परिवार की लड़कियाँ साईकल से उड़ने लगी और आश्चर्यजनक तौर पर इन दोनों योजनाओं का फायदा हुआ कि जो लड़कियों को लोग स्कूल भेजने लगे, वो शिक्षित होने लगी ! ये योजना बिहार के इतिहास में मेरे हिसाब से मिल का पत्थर साबित हुआ है ! इसी भरोसे के बलबूते आज स्कूटी से फर्राटे भर रही !
● अन्य कई छात्रवृत्ति की योजनाएं, शासन की जवाबदेही etc में भी व्यापक सुधार देखने को मिली !

परंतु बिहार के विकास की जिम्मेदारी 4-5 क्षेत्रों के बदौलत नहीं है ! निम्न सवालों का जबाब सरकार या विपक्ष घोषणा पत्र तक में नही दे पा रहे जिसका 10% तो कभी पूरा ही नही करते !

~एक भी बड़ी इंडस्ट्री बिहार में क्यों नही आई ? उन्हें सुरक्षा की गारंटी क्यों नहीं दे पाए ? या कैसे दे पाएंगे इसका कोई विज़न ?
~80 से 85 % अयोग्य लोगों को बिहार की शिक्षा की जिम्मेदारी किस आधार पर दी ? अयोग्यों की बड़ी फौज लगभग हर सेक्टर में तैनात कर रखी है ! 
~सरकारी कार्यालयों में संविदाकर्मियों को रखकर प्रतिभावान छात्रों का भविष्य बर्बाद करने का अधिकार किसने दिया ?
~ऑनलाइन गवर्नेंस में अन्य राज्यों की तुलना में फिस्सडी क्यों है बिहार ? अफसरशाही और भ्रष्टाचार को बढ़ाने के लिए !
~शराबबंदी से बिहार को कितना नुकसान हुआ इसका आंकलन कौन करेगा ! जनता से पूछे बिना फैसले किस आधार पर किये ? उसका नुकसान आम जनता पेट्रोल, स्टाम्प और बिजली पर लादे गए अनावश्यक टैक्स क्यों झेले ? 
~बिहार का अगले 20 या 50 सालों का कोई मास्टर प्लान तक क्यों नही है ! 2 दिन बैठकें करके पुल, हाईवे नहीं बना दिये जाते बल्कि प्रॉपर प्लानिंग की जरूरत होती है ! नहीं तो पटना नाले की पानी में डूबती रहेगी !
~जब देश के 9 शहरों में मेट्रो फर्राटे भर रही है तब 2nd सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य को मेट्रो की चिंता आयी है !
~रोजगार की संभावनाओं में बिहार नेगेटिव में ही पड़ा है ! बिहार के लेबर स्टेट बने रहने में किसका फायदा है आखिर !

बिहार अब बदलेगा ! अब मतदाता पहले जैसा नहीं है बल्कि हर 5 वर्ष पर सत्ता में परिवर्तन चाहता है ! मगर जनता के पास विकल्प है ही नही या कभी दिया ही नहीं गया, न दिया जाएगा ! 
वोटरों के बीच जातिवादी मानसिकता कहीं न कहीं उभर कर सामने आ ही रही है ! मगर लोकसभा के चुनाव में ये अलग दिखती है और विधानसभा में अलग !

ये नया बिहार है, अब नेताओं को जनता के सवालों से एनकाउंटर टाइप हो जा रहा है ! चाणक्य-चंद्रगुप्त की धरती के मतदाता इतनी आसानी से लोकतंत्र को तो धराशायी नहीं होने देंगे !

मतदाता निष्पक्षता से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रयोग से ऐसी सरकार का निर्माण करे जो उनके सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार के प्रति गंभीर हो ! जनभावना की कद्र करे, शासन को टाइट रखे, अफसरशाही को ऑनलाइन गवर्नेंस से सुधारे-जवाबदेह बनाये और रोजगार के व्यापक अवसर प्रदान करे ! निवेशकों को बिहार आने के लिए टैक्स आदि में छूट देकर रिझाए और न माने तो केंद्र को मजबूर कीजिये यहां इंडस्ट्रियल हब बनाने को ! 

IAS, IPS सहित अन्य सरकारी नौकरी की फैक्ट्री यूँ नही है हमारा बिहार ! नेतृत्व में अगर दम हो तो विकास के शिखर पर चढ़कर हम बिहारी झंडा गाड़ देंगे... 
#जय_हिंद 🇮🇳